देश को आजादी मिलने पर देश में लोकतांत्रिक सरकार चलाना कोई आसान काम नहीं था। ऐसे में हीरालाल शास्त्री ने राजस्थान प्रान्त में democratic system की नींव रखी। वे राजस्थान प्रान्त के पहले Chief minister बने जिन्होंने प्रान्त की Princely states se Loktantrik rajya की एक नई दिशा दी। उनके कार्यकाल में institution-building, social reform and political democratic governance integration को भी दिशा दी।
हीरालाल शास्त्री का जीवन परिचय
हीरालाल शास्त्री का जन्म 05 जनवरी 1899 को राजस्थान तत्कालीन जयपुर रियासत में हुआ था। वे एक अत्यन्त साधारण परिवार से आते हैं।
हीरालाल शास्त्री की शिक्षा
हीरालाल शास्त्री शिक्षा एवं विचारधारा में असाधरण थे। प्रारम्भिक शिक्षा के बाद वे Nationalist ideology से प्रभावित होकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुडकर राजनीति में सक्रिय हो गये। उनके अन्दर Public service, honesty और simplicity जैसे मूल्य विकसित हुये।
स्वतंत्रता आन्दोलन
वे एक Freedom fighter थे। उन्होंने Praja mandal movement के माध्यम से राजस्थान रियासतों में चेतना फैलायी।
Key Contributions in freedom struggle-
* राजनैतिक जागरुकता का प्रचार-प्रसार
* ब्रिटिश रूल और Feudal princely system के खिलाफ आन्दोलन
* जयपुर प्रजा मण्डल की स्थापना
* किसान, मजदूर के अधिकारों की आवाज
स्वतंत्रता के बाद वे लोकतांत्रिक व्यवस्था के विश्वसनीय चेहरा बने।
राजस्थान का गहन-
राजस्थान में स्वतंत्रता के बाद छोटी-छोटी रियासतों को एक कर एक बृहद राजस्थान बनाया। हीरालाल शास्त्री ने इसमें Political Consensus and administrative balance की भूमिका निभायी। 30 मार्च 1949 को राजस्थान का आफिसियल फोरमेसन हुआ। इसी दिन उन्हें प्रदेश का पहला मुख्यमंत्री बनाया।
मुख्यमंत्री के रूप में-उनके अल्प कालीन कार्यकाल में जब-
* सीमित संसाधन
* जनता की असीम अपेक्षाएँ
तब-
* लॉ एण्ड आर्डर की व्यवस्था
* एजूकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर
* पारदर्शी प्रशासन
* लोकतांत्रिक व्यवस्था की
उन्होंने सत्ता को Responsibility माना।
Philosophy-
राजनैतिक विचारधारा के स्तम्भ सोशल जस्टिस
* Anti-feudal mindset
* Ethical governance
* Values-based politics" का प्रतीक माना जाता है।
Historical Significance
* Politics को सर्विस के रूप में स्थापित किया
* feudal System से मॉडर्न गवर्नेंस तक का ब्रिज बने
* राजस्थान डेमोक्रेटिक फाउन्डेशन को शेप दिया। वे सत्ता के लिये नहीं, system बनाने के लिये राजनीति में थे।
मोर्डन राजस्थान-
आज राजस्थान में
* Electoral politics
* Coalition governments
* वेल फेयर स्कीम
* Identity-based डिबेटस देखे जाते हैं। तब हीरालाल शास्त्री का अथक परिश्रम याद आता है।
निष्कर्ष
हीरालाल शास्त्री का मानना था- सत्ता का उपयोग समाज को जोडने और आगे बढ़ाने के लिये किया जाना चाहिये। उनका जीवन - Reference point की तरह है जहाँ राजनीति शोर न होकर सेवा और संकल्प थी।