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वसंतदादा पाटिल महाराष्ट्र राजनीति के ऐसे शिल्पकार जिन्होंने कृषि, सहकारिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की पूरी संरचना को ही एक नया स्वरुप दिया। तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री सहकारी आन्दोलन के महानायक एवं गन्ना किसानों के संरक्षक ऐसे थे बसंतदादा पाटिल। वे एक राजनेता ही नहीं अपितु Maharashtra Cooperative movement & architect and Farmer- led development model के मजबूत प्रतीक थे।
वसंतदादा पाटिल का जीवन परिचय
वसंतदादा पाटिल का जन्म महाराष्ट्र प्रान्त के सांगली जिले के पडमाळे गांव में एक किसान परिवार में 13 नवम्बर 1917 को हुआ था। बालपन से ही
उन्होंने-
* ग्रामीण असमानताओं
* फसल की अनिश्चितता
* किसान की आर्थिक कठिनाइयाँ
* प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव नजदीक से देखा था।
इन सबने उनमें Farmer-centric politics की नींव डाली थी।
वसंतदादा पाटिल की शिक्षा
बसंतदादा की प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर ही हुई थी। युवावस्था में वे
* स्वतंत्रता आन्दोलन की विचारधारा
* छात्र आंदोलनों
* सामाजिक सुधार कार्यो
से प्रभावित हुए। वे मानते थे -" किसान अगर सशक्त होगा तो पूरा राज्य अपने आप मजबूत हो जायेगा "
स्वतंत्रता आंदोलन
स्वतंत्रता आन्दोलन से जुडने पर उन्होंने-
* ब्रिटिश सरकार का विरोध
* जन जागरूकता अभियानों
* कांग्रेस संगठन का विस्तार
में सक्रिय भाग लिया।
इन आन्दोलनों ने उनके भीतर discipline, sacrifice, and public service spirit को गहरा किया।
राजनीति
स्वतंत्र भारत में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े। शीघ्र ही वे -
* सहकारिता के रणनीतिकार
* किसान नेता
* ग्रामीण विकास के योजनाकार
के रूप में उभरे।
मुख्यमंत्री
वसंत दादा 1977 से 1978, 1983 से 1985, 1985 से 1988 तक तीन बार महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री बने।
अपने कार्यकाल में उन्होंने-
* ग्रामीण आर्थिक शक्ति
* किसान
* सहकारिता
* कृषि आधारित उद्योगों
पर फोकस किया।
उपलब्धियां
1. को-ऑपरेटिव सुगर इंडस्ट्री
वसंत दादा को महाराष्ट्र सहकारी चीनी क्रांति का जनक कहा जाता है। उन्होंने-
* ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग
* गन्ना किसानों को ऑनरशिप
* को-आपरेटिव सुगर इंडस्ट्रीज
* रोजगार
का सुजन कराया। उनका यही मॉडल भारत भर में Rural industrialisation model के रूप में फेमस हुआ।
2. ग्रामीण वित्त और सहकारी बैंक
* किसान ऋण व्यवस्था
* जिला सहकारी बैंक
* ग्रामीण societies को मजबूती दी।
इससे Formal Rural banking sector मजबूत हुआ।
3. ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर एवं सिंचाई
वे मानते थे -
"पानी = किसान = समृद्धि"
अतः उन्होंने
* ग्रामीण सड़कें
* नहर
* बाँध
* विद्युत
* निर्वाध जल आपूर्ति
अतः पश्चिमी महाराष्ट्र कृषि का Power house बना।
4. कृषि उद्योग
दूध, गन्ना, फल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देकर महाराष्ट्र को एग्रो इंडस्ट्रियल हब बनाया।
व्यक्तित्व
* किसान समर्थक
* जमीन से जुड़े लीडर
* त्वरित निर्णय लेने वाले
* मितभाषी
* साहसी
लीडर थे। उनकी लीडरशिप स्टाइल "Bold decision with first-mover vision" थी। वे खेतों और गाँव से नीतियाँ बनाते थे।
चुनौती
उन्हें राजनैतिक जीवन में चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा
* सत्ता संघर्ष
* गठबंधन की राजनीति
* पार्टी के अन्दर विरोध
किन्तु हर बार वे जनता और किसान शक्ति के बल पर वापस लौटे।
निधन
वसंत दादा पाटिल का निधन 1 मार्च 1989 को हुआ था। परन्तु वे जीवित हैं -
* चीनी कारखानों में
* ग्रामीण बैंकों में
* सहकारी संस्थाओं में
* महाराष्ट्र की समृद्ध अर्थव्यवस्था में
उन्हें सम्मान के साथ-
* "किसानों का मसीहा"
* "सहकारिता सम्राट"
* "Rural Economy Builder"
कहा जाता है।
निष्कर्ष
पाटिल का जीवन सिद्ध करता है- "अगर नेतृत्व गांव से निकले और निर्णय खेतों के लिये हो, तो पूरा राज्य समृद्ध बन सकता है।"
वे याद किये जायेंगे the architect of Cooperative revolution, the farmer's leader, and the rural economy builder of Maharashtra के रूप में।