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भगवत दयाल शर्मा ऐसे महान नेता थे जो कि हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री बने और राज्य के सामाजिक, प्रशासनिक और आर्थिक ढांचे की नीम रखी थी। हरियाणा की पहचान एकता और प्रोग्रेस के लिए आज भी उनका नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है।
भगवत दयाल शर्मा का जीवन परिचय
भगवत दयाल शर्मा का जन्म 26 जनवरी 1918 को रोहतक जिले के बेरी गाँव में किसान परिवार में हुआ था किसानों की कठिनाई और आम आदमी का संघर्ष का जीवन उन्होने नजदीक से देखा था। बचपन से ही उनमें समाज सेवा के लक्षण स्वाभाविक रूप से दिखाई देते थे।
भगवत दयाल शर्मा की शिक्षा
शर्मा जी ने प्रारम्भिक शिक्षा हरियाणा राज्य से और उच्च शिक्षा पंजाब विश्वविद्यालय से पूरी की पढ़ाई के दौरान ही उनमें राष्ट्र भक्ति और जनता की सेवा करने के भावना जाग्रत हुई थी।
स्वतंत्रता आन्दोलन
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने महात्मा गाँधी के नेतृत्व में सक्रिय हिस्सा लिया क्विट इण्डिया मूवमेंट के दौरान वे जेल में गए उनके अनुसार - "देश के लिए सेवा, राजनीति का सबसे पवित्र रूप है।
राजनैतिक यात्रा
स्वतंत्र भारत में उन्होने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की युवाओं किसानों और दवे कुचले लोगों के लिये उन्होंने अथक कार्य किये जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी और उनको प्रदेश के प्रमुख नेताओ की श्रेणी में स्थान मिला।
हरियाणा के प्रथम मुख्यमंत्री
1 नवम्बर 1966 कों जब पंजाब प्रान्त से अलग होकर हरियाणा एक नया राज्य बना तो भगवत दयाल शर्मा इसके पहले मुख्यमंत्री बने।
उपलब्धियां
* हरियाणा के विकास के लिए मजबूत प्रसाशनिक ढांचा तैयार किया।
* ओद्योगिक विकास की नीम रखी।
* कृषि,सिचाई और ग्रामीण विकास कों प्राथमिकता दी।
* शिक्षा और स्वास्थ सेवाओं का विस्तार किया।
राज्यपाल
मुख्यमंत्री पद के बाद उन्हें ओड़िशा फिर मध्य प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया। गवर्नर रहते हुए उन्होने अनेक विकास कार्य कराये उनकी विनम्रता और संतुलित राजनैतिक दृष्टि की सभी ने प्रसंशा की।
व्यक्तित्व
* किसान और ग्रामीण समाज के सच्चे हितैषी।
* शांत विनम्र और सरल व्यवहार।
* ईमानदार और सिद्धांत वादी।
* जनता से सीधा संवाद रखना।
निधन
भगवत दयाल शर्मा का 22 फरवरी 1993 को निधन हो गया थाI उनके निधन ने हरियाणा सहित पुरे देश में शोक की लहर पैदा कर दीI उनके विचार और आदर्श आज भी जीवंत है।
निष्कर्ष
भगवत दयाल शर्मा का जीवन जन सेवा, नैतिकता और विकास के प्रति समर्पित रहा था हरियाणा की पहचान, प्रगति और स्थिरता में उनका यादगार योगदान रहा वास्तव में वे - "जनता के नेता और हरियाणा के निर्माण पुरुष थे "