Table of Contents
गुरमुख निहाल सिंह ऐसे नेता रहे जिन्होंने जनसेवा और देश सेवा को ही अपना जीवनकर्तव्य माना। वे दिल्ली के दूसरे मुख्य मंत्री बने। उनकी जनहितकारी सोच ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया।
गुरमुख निहाल सिंह का जीवन परिचय
गुरमुख निहाल सिंह का जन्म सन् 1895 में हुआ था। एक साधारण एवं समृद्ध परिवार में जन्मे गुरमुख निहाल सिंह शुरू से ही एक जनसेवक के रूप में कार्य करते रहे।'
गुरमुख निहाल सिंह की शिक्षा
शिक्षा के प्रति उनका लगाव बचपन से ही रहा था। उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद अध्यापन का कार्य किया। उनकी विद्यार्थियों के प्रति संवेदन सीलता ने समाज में एक आदर्श स्थान दिलाया। उनकी सोच - education is the foundation of a strong society." की थी।
राजनीति
गुरमुख निहाल सिंह कांग्रेस पार्टी से जुड़कर संगठन के लिये कार्य किया। पार्टी ने उनकी ईमानदारी, साफ छवि को देखकर उन पर गहरा विश्वास किया। उनका उद्देश्य था- जनता की भलाई, व्यवस्था में सुधार और एक सक्षम प्रशासन का निर्माण।
मुख्यमंत्री
गुरमुख निहाल सिंह 1955 में दिल्ली के दूसरे मुख्यमंत्री बने। उनका कार्यकाल भले ही अल्प अवधि का रहा हो किन्तु व्यवस्था में सुधार और विकास में उनका प्रमुख योगदान रहा था।
प्रमुख कार्य
* प्रशासनिक व्यवस्था
उन्होने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करते हुये गवर्नेन्स स्ट्रेक्चर को व्यवस्थित किया।
* संस्थागत और शिक्षा का विकास
शिक्षा के प्रति रुझान होने के कारण उन्होंने स्कूलों और शिक्षण संस्थानों को मजबूत आधार प्रदान किया।
* शहरी विकास योजनाएं
स्वास्थ्य सेवाओं, सड़क निर्माण और नई बस्तियों का विकास किया।
* नेतृत्व में अनुशासन
उनकी लीडरशिप स्थिर, जनता से सीधा संवाद, शांत, सुतुलित और विकास आधारित थी। जो कि इफेक्टिव गवर्नेन्स का सर्वोत्तम उदाहरण मानी जाती है।
* गवर्नर राजस्थान
राजस्थान के गवर्नर के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किये -
* प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा
* शिक्षण संस्थानों को मज़बूती
* सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम को बढ़ावा
व्यक्तित्व
गुरमुख निहाल सिंह व्यक्तित्व के धनी रहे थे। वे सज्जनता और सादगी की प्रतिमूर्ति थे। उनका मानना था—"अच्छा नेता वही है जो कम बोले, काम ज्यादा करे।"
समाज में योगदान
निम्न बिंदुओं से समझा जा सकता है।
* ग्रामीण विकास
* युवा सशक्तिकरण पर कार्य
* गरीब और वंचित वर्ग के लिये कार्य
* शिक्षा का प्रसार
निधन
गुरुमुख निहाल का निधन 1990 में हुआ था। उनके द्वारा किये गये कार्यों को आज भी सराहा जाता है। -
* एक अनुशासित प्रशासक के रूप में
* ईमानदार नेता के रूप में
* आदर्श शिक्षक के रूप में
* प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में
निष्कर्ष
गुरमुख निहाल सिंह भारतीय राजनीति में एक ईमानदार नेता, लोकप्रिय जन प्रतिनिधि महान जन सेवक, पारदर्शी प्रशासक के रूप में याद किये जाते हैं। "एक सच्चे शिक्षक आदर्श प्रशासक और जनता के नेता" के रूप में आगे भी याद किये जायेंगे।