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UGC कानून वास्तव में है क्या ?
UGC कानून अर्थात University. Grants Commission. Act, 1956 भारत की संसद द्वारा एक पारित एक केन्द्रीय कानून जिसके तहत भारत में विश्व विद्यालयों की देख रेख और उच्च शिक्षा के मानकों को बनाये रखने के लिये विश्व विद्यालय अनुदान आयोग (UGC ) की स्थापना की गयी। यह कानून 1956 से लागू है और उच्च शिक्षा की ब्यवस्था निरन्तर इसके अन्तर्गत की जा रही है।
UGC स्थापना का कारण
स्वतंत्र भारत में विश्व विद्यालयों की संख्या में तेजी से इजाफा होता जा रहा था। इनकी गुणवत्ता, मानक और वित्तीय सहायता को नियंत्रित करने के लिये एक केन्द्रीय संस्था की जरूरत महसूस की गयी। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिये 1853 में यूजीसी की स्थापना की गयी और 1956 में इसे कानूनी दर्जा दिया गया। यूजीसी एक्ट-1956 की धरायें
विश्व विद्यालयों की मान्यता
यूजीसी तय करता है कि कौन सा संस्थान विश्व विद्यालय कहलाने का अधिकार रखता है।
वित्तीय सहायता
यूजीसी केन्द्र सरकार से मिलने वाले अनुदान को कॉलेजो और विश्वविद्यालयों में वितरित करता है।
शैक्षणिक मानक
यूजीसी पाठ्यक्रम, परीक्षा और शिक्षण गुणवत्ता हेतु मानक तय करता है
फर्जी विश्व विद्यालयों पर कार्यवाही यूजीसी गैर मान्यता प्राप्त संस्थानों पर कार्यवाही करके उन्हें फर्जी घोषित करता है
यूजीसी की शक्तियाँ
- नये विश्वविद्यालयों की स्वीकृति
- शिक्षकों की योग्यता तय करना (NET आदि )
- विश्वविद्यालयों का निरीक्षण
- नियम और विनियम बनाना
- यूजीसी और नेट परीक्षा
UGC कि नेट के माध्यम से
- असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की पात्रता तय होती है।
- जूनियर रिसर्च फैलोशिप (JRF ) तय होती है।
अभी के बदलाव
भारत सरकार ने UGC के ढांचे में बदलाव के तहत नई शिक्षा नीति (NEP 2020) में उच्च शिक्षा नियमन में सुधार की बात कही है।
UGC कानून के लाभ
- फर्जी संस्थानों पर रोक
- गुणवत्ता नियंत्रण
- उच्च शिक्षा में एक रुपता
- राष्ट्रीय स्तर पर मानक तय करना
आलोचनाएं
- विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर सवाल
- नियामक प्रक्रिया में देरी
- अत्यधिक केन्द्रीकरण
निष्कर्ष
यूजीसी एक्ट, 1956 कानून ने विश्व - विद्यालय की गुणवत्ता, वित्तीय सहायता और मान्यता को ब्यवस्थित करने का कार्य किया है। भले आज यूजीसी कानून-1956 में सुधार की जरूरत है परन्तु फिर भी यूजीसी भारतीय शिक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तम्भ है।