भारतीय राजनीति में मदनलाल खुराना एक जन प्रिय, कर्तव्य निष्ठ और ईमानदार लीडर रहे है। वे आम जनमानस में इतने लोकप्रिय हो गये थे कि दिल्ली की जनता उन्हें प्यार से "दिल्ली का शेर" कहती थी। केन्द्र सकार में मंत्री
मदन लाल खुराना का जीवन परिचय
खुराना का जन्म 15 अक्टूबर 1936 को फैसलाबाद, जो अब पाकिस्तान में है, हुआ था। सन् 1947 के भारत-पाक बटवारे के बाद वे और उनका परिवार भारत में आकर बस गए। शरणार्थियों और गरीबों की पीड़ा उन्होंने नजदीक से देखी थी। उनकी पीड़ा से द्रवित होकर उन्होंने समाज सेवा करने की ठानी।
मदन लाल खुराना की शिक्षा
भारत में आकर उनका परिवार दिल्ली में बस गया। मदन लाल खुराना ने दिल्ली विश्व विद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की। वे छात्र राजनीति में हिस्सा ने उन्हें छात्रों के बीच लोकप्रिय बना दिया।
जन संघ और भाजपा की और झुकाव
सन् 1960 के दशक में वजन संघ के लिए कार्य करने लगे। बाद में जब भाजपा का गठन हुआ तो वे भाजपा के प्रमुख नेताओं में उनकी गिनती होने लगी।
दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में
सन् 1993 मे जब दिल्ली में विधान सभा चुनाव हुये तो बीजेपी को भारी बहुमत से जीत मिली। मदन लाल खुराना को दिल्ली का मुख्या मंत्री बनाया गया। उनका कार्यकाल नई उपलब्धियाँ लेकर आया।
उपलब्धियां
* Metropolitan city: के रूप में दिल्ली को विकसित करना इसके अन्तर्गत नई सड़क, पलाईओवर और बस सेवाओं का विस्तार किया
* शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा विस्तार: इसके अन्तर्गत उन्होंने स्कूलों और अस्पतालों में सुधार किया।
* व्यापारी हितों की रक्षा: उन्होंने व्यापारी को इंस्पेक्टर राज से मुक्ति दिलाई और याता करने का सुगम मार्ग प्रशास्त किया
* भ्रष्टाचार पर अंकुश: उन्होंने करप्शन पर अंकुश लगाकर साफ सुथरी राजनीति की थी।
जब अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधान मंत्री बने तो उन्हें टूरिज्म एक पालियामेन्टरी अफेयरस मिनिटर बनाया वे कार्यकाल में पर्यटन के क्षेत्र में अनेक कार्य किये गये। जिससे भारतीय सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर बढ़ावा मिला।
दिल्ली की राजनीति में प्रभाव
दिल्ली की जनता उन्हें अपने बीच का एक अपना नेता मानती थी। वे भी जनता से सीधा संवाद कर समस्याएं सुनते थे और अति शोधा समस्याओं का निराकरण भी कराते थे।
उनके द्वारा किये गये सामाजिक कार्य जनता के बीच आज भी सहारे जाते है:
* गरीब बस्तियों का विकास
* शरणार्थियों की सहायता
* नागरिक अधिकारों की रक्षा
* शिक्षा स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार उनका मानना था - "जनता का भरोसा - जीतना, न कि सत्ता का स्वाद चखना।"
निधन
सन् 2018 में उनका निधन हो गया। दिल्ली की जनता ने इस दिन अपने प्रिय नेता को हमेशा के लिए खोया था।
विरासत
* पारदर्शी प्रशासन परम्परा
* एक मजबूत, आधुनिक दिल्ली
* कुराल नेतृत्व
* ईमानदारी और संघर्षशीलता
निष्कर्ष
खुराना जी सही मायने में जनता के नेता थे। स्वच्छ छवि, ईमानदारी, कुशल नेतृत्व कर्ता के रूप में वे हमेशा याद किये जाएंगे " दिल्ली के सादगी भरे, जनप्रिय और साहसी नेता के रूप में।