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लोकतांत्रिक देश भारत में ऐसे लीडर हुए हैं, जिन्होंने अपने देश की सेवा से अपने आपको उच्च सिद्ध किया है। भीम सेन सच्चर उन्हीं नेताओं में से एक हैं। वे एक स्वतन्त्रता सेनानी, पंजाब के मुख्यमंत्री, कई राज्यों के राज्यपाल के तोर पर भी शांत और नेतृत्व क्षमतावान रहे हैं।
भीमसेन सच्चर का जीवन परिचय
भीमसेन सच्चर (Bhim Sen Sachar) का जन्म 18 दिसंबर 1894 को पंजाब में हुआ था?
भीमसेन सच्चर की शिक्षा
अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने वकालत की और एक प्रसिद्ध वकील बने। किन्तु उनका मुकाम जल्दी ही स्वतंत्रता आन्दोलन की ओर हो गया।
स्वतंत्रता संघर्ष में सक्रियता
पंजाब कांग्रेस के लीडरों में वे स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख चेहरा रहे। उन्होंने -
* ब्रिटिश सरकार का विरोध
* राष्ट्रीय एकता हेतु संगठनात्मक कार्य
* सत्याग्रह आन्दोलन में भूमिका
* जनमानस में राजनीतिक जागरुकता
ब्रिटिश सरकार ने उनकी गिरफ्तारी भी की परन्तु वे टस से मस नहीं हुए। कहा जाता है, कि सच्चर जी राजनीत नहीं, राष्ट्र सेवा करते थे।"
सक्रिय राजनीति में
स्वतंत्र भारत में वे पंजाब प्रान्त में कांग्रेस पार्टी के प्रमुख चेहरा थे।
* उनमें प्रशासनिक समझे बहुत गहरी थी।
* वे व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से मुक्त थे।
* नैतिकता आधारित राजनीति के समर्थक थे।
* जनहित को सर्वोपरि रखते थे।
पंजाब प्रान्त के मुख्यमंत्री
स्वतंत्रता के बाद भीमसेन सच्चर पंजाब प्रान्त के मुख्यमंत्री बने। विभाजन का दंश झेल रहे पंजाब प्रान्त में शरणार्थियों की समस्या, आर्थिक स्थिरता व सामाजिक तनाव पूरे प्रान्त को अस्थिर कर रहा था।
ऐसे में-
* शरणार्थियों का पुनर्वास
* स्थिर और शांत निर्णय क्षमता
* प्रशासनिक सुधार
* रोजगार के साधन
* मूलभूत सुविधाएँ
जनता को मुहैया कराने में अग्रणी भूमिका निभायी।
राज्यपाल
वे ओडिशा, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र (अस्थायी कार्यकाल) और तमिलनाडु के राज्यपाल रहे। वे मर्यादा और शांत नेतृत्व की प्रतिमूर्ति रहे।
सच्चर कमेटी
उन्होंने 1948 में सच्चर कमेटी का नेतृत्व किया। जिसमें शरणार्थियों के पुनर्वास, राज्यों के आर्थिक पुनर्गठन में प्रमुख भुमिका अर्पित की। उनकी रिपोर्ट को आज भी प्रशासनिक Planning and Social rehabilitation में महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता जाता है।
व्यक्तित्व
* निर्विवाद
* विनम्र, शांतव सरल
* संतुलित एव त्वरित निर्णय
* High moral integrity
* संवैधानिक मूल्यों के रक्षक
वे एक Loud leadership न होकर, किन्तु ethical leadership के उदाहरण थे।
निधन
18 जनवरी 1948 को उनका निधन हुआ था।
वे जीवित हैं-
* क्योकि पुनः निर्माण में भूमिका
* शरणार्थी पुनर्वास विकास मॉडल भूमिका
* राज्यपाल के रूप में संविधान प्रहरी
* सादगी और ईमानदारी
निष्कर्ष
सच्चर का जीवन सिखाता है- " नेतृत्व का मूल्य उसके शोर से नहीं, उसकी सुचिता से मापा जाता है। वे याद किये जाएंगे - the ethical administrator, the Calm states man के रूप में।