भारत की राजनीति में चौधरी देवी लाल एक ऐसा स्थान रखते हैं। जो केवल जनसेवा को ही अपना परम कर्तव्य मानते हैं। किसानों के परम हितैषी रहे देवी लाल को किसान 'ताऊ' कहकर पुकारते थे। वे हरियाणा के दो बार मुख्यमंत्री और भारत के उप-प्रधानमंत्री रहे। वे एक स्वतंत्रता सेनानी, किसान मसीहा एवं जमीन से जुड़े नेता थे। राष्ट्रीय राजनीति में उन्होंने अलग ही पहचान बनाई। 

चौधरी देवी लाल का जीवन परिचय

चौधरी देवीलाल का जन्म सिरसा जिले के तेजाखेडा गाँव में 25 सितम्बर 1914 को हुआ था। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे देवीलाल के पिता विहारीलाल एक सम्मानित किसान थे। 'ताऊ' का बचपन संघर्षों में बीता था। ग्रामीण परिवेश से उठकर उन्होंने राजनीति में अपना स्थान बनाया। 

स्वतंत्रता आन्दोलन में भूमिका

उन्होंने 1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन में प्रमुख भूमिका निभाई। स्वतन्त्रा सेनानियों के साथ जेल गये। प्रताड़ना झेली।

उनका योगदान -

* ब्रिटिश सरकार के खिलाफ सत्याग्रह

* जेल की यात्राऐं

* युवाओं और किसानों को जेल भरो आन्दोलन से जोड़ा

राजनीति

सन् 1952 में वे पहली बार विधायक चुने गए। राजनीति के लिये उनका मानना था- "राजनीति जनता के हक के लिए है, नेता के सम्मान के लिए नही।" किसानों के लिए वे सिंचाई, पानी और जमीन से जुड़े मुद्दे पर आवाज उठाते थे।

देवीलाल 1977 से 1979 और 1987 से 1989 तक दो बार हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उनके शासनकाल को किसान नीति, सामाजिक न्याय और प्रशासनिक सुधार का सुनहरा काल माना जाता है।

उपलब्धियां

* वृद्धावस्था पेशन की शुरुआत

* ग्रामीण सड़‌को और सिचाई परियोजना की शुरुआत * पंचायतो को मजबूत किया

* किसान कर्जमाफी की घोषणाएँ

* दलित, मन्द मजदूर और किसान के उत्थान की घोषणाए

उप-प्रधानमंत्री

सन् 1989 में जनता दल सरकार में वे भारत के उप-प्रधान मंत्री बने। उनकी राष्ट्रीय छवि एक साफ-सुथरी, साधारण, ईमानदार और किसान आधारित लीडर की थी।

किसान आन्दोलन और जनता से सीधा जुडाव

हमेशा खेत-खलिहान की भाषा बोलने वाले देवी लाल के बारे में किसानों का कहना था- देवीलाल वह नेता है जो किसानों की आँखो का दर्द भी पढ़‌ लेते हैं।

व्यक्तित्व

* गाँव की चौपाल से संसद तक एक जैसे थे।

संघर्षशील, स्पष्टवादी और जनहितकारी थे।

बेहद सरल और जमीन से जुड़े नेता थे।

उनके भाषणों में तर्क, सच्चाई और ग्रामीण भावना फलकती थी।

घमण्ड से दूर और जनता में घुल-मिल जाते थे।

निधन

06 अप्रैल 2001 को देवी लाल का निधन हुआ था। हरियाणा ही नहीं बल्कि देश के लिए यह अपूर्णीय क्षति थी। 

विरासत  

* किसान राजनीति को प्रमुख पहचान देना

* सरल, सस्ती और जनता से जुडी राजनीति

* सामाजिक न्याय को राजनीति का मुख्य आधार बनाना

निष्कर्ष

देवीलाल भारतीय राजनीति के एक प्रेरक अध्याय है

* किसान नेता

* स्वतन्त्रता सेनानी

* साधारण किसान का बेटा

* दो बार मुख्य मंत्री

* भारत का उप-प्रधान मंत्री

उनका जीवन संदेश देता है- "नेतृत्व धन से नही धरती से आता है और जनता को केवल वही नेता याद रहता है, जो उनके दिलों में बसता है।