हरियाणा प्रदेश के राजनैतिक निर्माण में राजनेताओं ने अपनी सक्रिय भूमिका निभायी। उनमें से प्रमुख रुप से राव वीरेन्द्र सिंह का नाम लिया जाता है। वे एक राजनेता ही नही अपितु विजनरी लीडर, सोशल रिफोर्मर और एक मजबूत प्रशासक थे।
राव वीरेन्द्र सिंह का जीवन परिचय
राव वीरेन्द्र सिंह का जन्म रेवाडी जिले के नया गाँव में 20 फरवरी सन् 1921 को हुआ था। वे राव तुलाराम के वंश से जुड़े थे जिन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संगाम के सेनानी माने जाते हैं। प्रतिष्ठित यादव परिवार में जन्मे राव वीरेन्द्र सिंह वंशानुगत वीरता, सम्मान, और नेतृत्व क्षमता में कुशलता रखते थे।
राव वीरेन्द्र सिंह की शिक्षा
उनकी शिक्षा दिल्ली और राजस्थान में पूरी हुई। उनकी रुचि हिस्ट्री गवर्नेन्स और पब्लिक अफेयर्स थी।
स्वतंत्रता संग्राम
युवा अवस्था से राव वीरेन्द्र ने ब्रिटिश शासन का पुरजोर विरोध किया। उनका मानना था कि राजनीति सत्ता का माध्यम न होकर देश सेवा है।
राजनैतिक जीवन
स्वतंत्र भारत में वे कांग्रेस पार्टी से जुड़े और किसानों, मजदूरों दलितो, वंचितों के लिये सीधे संवाद कर उनकी भलाई के कार्य किये।
संयुक्त पंजाब के मुख्यमंत्री
राव वीरेन्द्र सिंह संयुक्त पंजाब के मुख्य मंत्री रहे तब तक हरियाणा राज्य का गठन नही हुआ था। हालांकि उनका यह कार्यकाल अल्प समय का रहा था। उनके प्रशासनिक निर्णय हरियाणा प्रान्त गठन में, एक भूमिका के रूप में देखे जाते है।
हरियाणा राज्य निर्माण
उनका मानना था कि हरियाणा नाम से एक अलग ही प्रान्त हो जिसका अपना अलग एक स्वतंत्र ढांचा हो। और देश के विकास में उसका प्रमुख रोल हो। हरियाणा राज्य निर्माण में उनके संघर्ष को भुलाया नही जा सकता।
लोक सभा और विधान सभा में योगदान
लोकसभा में सांसद और विधानसभा में विधायक वे कई बार रहे अपने कार्य काल में उन्होंने कृषि क्षेत्र में सुधार, शिक्षा ग्रामीण विकास, रोजगार, इन्फ्रांस्ट्रेक्चर जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया और उन पर कार्य भी किया। जनता की समस्याओं पर उनका फोकस रहा।
एक जन प्रिय लीडर
* ग्रामीण समाज में गहरी पेंठ और समझ
* संवाद के पक्षधर
* युवाओं को आगे लाने के पक्षधर
* सहज सरल व्यक्तित्व
* पारदर्शी प्रशासन के पक्षधर
निधन
राव वीरेन्द्र का 30 सितम्बर 2009 को निधन हो गया था यह हरियाणा ही नहीं अपितु देश के लिये अपूरणीय क्षती थी।
निष्कर्ष
राव वीरेन्द्र एक जनता के सच्चे हितैषी, हरियाणा प्रान्त के निर्माण के प्रमुख कर्ता धर्ता के रूप में इतिहास उन्हें हमेशा याद रखेगा।