भारतीय राजनीति में ऐसे महान नेता हुये है जिन्होंने केवल और केवल जन सेवा को अपनी राजनीति का आधार बनाया था। डा गोपीचन्द भार्गव उन्ही नेताओ में में से एक रहे हैं। वे पंजाब के प्रथम मुख्यमंत्री, स्वतंत्रता सेनानी व आदर्श चिकित्सक रहे हैं। उनकी राजनीति का आधार- ईमानदारी मानवता और जन कल्याण- न कि सत्ता की महत्वाकांक्षा 

गोपीचन्द भार्गव का जीवन परिचय

गोपीचंद भार्गव (Gopi Chand Bhargava) का जन्म पंजाब प्रान्त के सिरसा (जो कि अब हरियाणा का सिरसा है) में हुआ था। उनके पिता बाल मुकुन्द जो कि एक प्रसिद्ध वैघ थे। गोपी चन्द शुरु से ही जन सेवा को तत्पर रहते थे।

गोपीचन्द भार्गव की शिक्षा

भार्गव जी ने मेडीकल शिक्षा किंग एडवर्ड मेडिकल कॉलेज ‌लाहौर से प्राप्त की थी। जो कि देश के आधुनिक चिकित्सकों में गिने जाते थे। लोगों का कहना था- डॉ भार्गव इलाज का शुल्क नहीं, बल्कि आशीर्वाद लेते हैं।"

स्वतंत्रता आन्दोलन

* वे स्वतंत्रता आन्दोलन के सक्रिय सेनानी थे

* महात्मा गांधी के आन्दोलनों के प्रब‌ल समर्थक

* जलियांवाला बाग कांड के बाद विरोध रैली में शामिल

* अंग्रेजो के खिलाफ बगावत

राजनीति

स्वतंत्र भारत में प्रान्तीय सरकारों के गठन में वे कांग्रेस पार्टी से पंजाब विधानसभा के लिये चुने गये। 

पार्टी में वे-

* नैतिकता का आधार थे।

* संतुलन की आवाज थे। 

* सादगीपूर्ण नेतृत्वकर्ता थे। 

पंजाब के पहले मुख्यमंत्री

सन् 1947 के बंटवारे के बाद देश विभाजन का दंश झेल रहा था। पंजाब का मुखिया होने के नाते प्रान्त में शांति स्थापित करना उनकी पहली प्राथमिकता थी। उनके कार्य-

शांति स्थापित करना

* उन्होंने Communal harmony को प्रथम वरीयता दी।

* शरणार्थी पुनर्वास

* लोगों के लिये राहत शिविर

* राशन व्यवस्था

* रोजगार सृजन

सामाजिक रिफरता

उन्होंने शांति व्यवस्था बहाल कर एक शांत, मर्यादित शासन देकर लोगों का भरोसा जीता।

दूसरी बार मुख्यमंत्री

1964 में राजनैतिक अस्थिरता बढने पर वे पंजाब के दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। उनकी नेतृत्व शैली समस्या को समझकर, संतुलन बनाकर, शांति स्थापित करने की थी।

हरियाणा पर अट-

भार्गव भले ही पंजाब के मुख्यमंत्री थे परन्तु सिरसा, हिसार क्षेत्र पर प्रभाव होने के कारण हरियाणा पर भी उनका असर था। क्योंकि-

* सिरसा में उनका सत्यधिक प्रभाव था।

* प्राथमिक स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रारम्भिक संरचना की नींव 

* ग्रामीण सुधार की नीव

* संवेदनशील

* नैतिक मूल्य आधारित नेता थे।

उनका सिद्धान्त नेतृत्व सेवा से बड़ा होता है, सत्ता से नहीं।"

निधन

भार्गव जी का निधन 1966 में हुआ था। वे पंजाब के प्रथम मुख्यमंत्री, प्रसिद्ध डॉक्टर, स्वतंत्रता आन्दोलन के सिपाही के रूप में आज भी याद किये जाते हैं। उनकी राजनीति का उद्देश्य विभाजन नहीं बल्कि समाज का उपचार है।"

भार्गव जैसे लीडर विरले होते हैं। अपने योगदान के लिए वे आज भी याद किए जाते हैं- the tumble heater the ethical administrator and the first guiding force of modern Panjab.