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हरियाणा प्रदेश में एक समय ऐसा भी आया जब राजनैतिक उथल-पुथल का काल रहा। ऐसे समय में राजनैतिक अस्थिरता को संभालने के लिये एक शांत, संतुलित और भरोसेमंद नेता की प्रदेश नेतृत्व को संभालने की महती आवश्यकता थी। ऐसे नेता थे गुरमीत सिंह। जिन्होंने अल्प समय के अन्तरिम नेतृत्व को संवैधानिक मर्यादा निभाते हुऐ संभाला जो कि दर्शाता है, कि लीडरशिप सिर्फ समय की लम्बाई नहीं, जिम्मेदारी निभाने की क्षमता से जाना जाता है।
गुरमीत सिंह का जीवन परिचय
गुरमीत सिद्धू हरियाणा प्रान्त के एक संस्कारवान एवं शिक्षित परिवार से आते हैं। उनमें समाजसेवा, संस्कार, नेतृत्व क्षमता, देशसेवा जैसे स्वाभाविक गुण मौजूद थे।
राजनीति में मौजूदगी
वे राजनीति में सीधे सक्रिय नहीं रहे। किन्तु राज्य प्रशासन एवं शासन व्यवस्था की उनमें गहरी समझ थी। उनका मुख्य योगदान administrative clarity, constitutional discipline और public responsibility में रहा।
हरियाणा के अंतरिम मुख्यमंत्री
ऐसे समय जब न तो राजनैतिक दल स्थिर सरकार बना पा रहे थे और न ही प्रशासनिक कार्य सुचारु रूप से चल रहा तब सरकार की निरन्तरता बनाये रखने के लिए गुरमीत सिंह को प्रान्त का अन्तरिम मुख्यमंत्री बनाया गया।
उपलब्धियाँ
* प्रशासनिक स्थिरता उनका उद्देश्य राज्य प्रशासन को स्थिरता प्रदान करना था।
* निष्पक्षता उन्होंने किसी गुट के दबाब से दूर होकर Purely constitution framework किया।
शांत एवं प्रभावशाली नेतृत्व
उनकी clam presence ने ब्यूरोक्रेसी और जनता दोनों का भरोसा जीता।
प्रभावी कार्यकाल
उन्होंने "constitutional caretaker" की भूमिका संवैधानिक मर्यादा के साथ निभाई।
व्यक्तित्व
* सादगी * शांत स्वभाव * अनुशासित
उनके लीडरशिप स्टाइल को "quit yet effective leadership" कहा जा सकता है।
निष्कर्ष
उनकी सोच "छोटा कार्यकाल भी बड़ा प्रभाव छोड़ सकता है। यदि नेतृत्व ईमानदार और संतुलित हो।" वे याद किए जाएंगे The Calm Caretaker, stabilizing force and political neutrality के रूप में।