शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक शासन किया। आम जनमानस में वह "मामा" से संबोधित किये जाते हैं। जो कि एक सामाजिक और भावनात्मक पहचान है। उन्होंने क्षात्र राजनीति से लेकर कई बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद को भी संभाला है। वह राजनीति में welfare governance, mass connect and electoral durability का उदाहरण हैं।

शिवराज सिंह चौहान का जीवन परिचय व शिक्षा

चौहान उर्फ "मामा" का जन्म मध्यपदेश प्रान्त के सिहोर जिले में 5 मार्च 1959 को एक अत्यन्त साधारण कृषक परिवार में हुआ था। उनका जीवन संघर्षमय रहा था। मध्य प्रदेश से शिक्षा प्राप्त करने के दौरान ही वे ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) से जुड गये। उनके अन्दर छात्र राजनीति से ही नेतृत्व क्षमता विकसित हो गयी थी।

राजनीति में प्रवेश व संसदीय यात्रा

सन 1990 में उन्होंने संसदीय सीट जीत कर पहली बार लोकसभा पहुंचे। वे सबसे कम उम्र के उस समय के युवा सांसद थे। बाद में उन्होंने-

* कई बार लगातार लोकसभा चुनाव जीता

* सक्रिय और अनुशासित सांसद की छवि बनायी।

* BJP के उभरते लीडर बने

संसदीय राजनीति में 

* किसान 

* ग्रामीण विकास 

* सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे उठाए 

शिवराज सिंह 2005 में प्रथम बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने। यह समय था- 

* भाजपा को सत्ता संभाले हुए कुछ ही समय हुआ था 

* जनता को Governance को लेकर अपेक्षाएँ थी।

उनका मुख्यमंत्री बनना एक नए governance narrative की शुरुआत थी।

कार्यकाल

शिवराज सिंह चौहान 2005 से 2018 तक एवं 2020 से 2023 तक कुल 18 वर्ष मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।

मामा मॉडल

जनकल्याण आधारित Governance 

1. किसान केन्द्रित योजना

* किसान ऋण 

* सिंचाई परियोजनाएँ

* ग्रामीण बुनियादी ढाँचा 

2. बालिकाओं की शिक्षा और सुरक्षा योजना

* Social welfare Schemes

* महिला विकास की राजनीति

3. मुख्यमंत्री कन्यादान योजना

* आर्थिक रुप से कमजोर वर्गो के लिए

* सामूहिक विवाह और सामाजिक सहयोग मॉडल इससे ग्रामीण एवं महिला मत‌दाताओं में मजबूत आधार मिला।

नेतृत्व

* Centralized decision-making

* mass Communication का संयोजन रहा।

विशेषताएँ

* डायरेक्ट पब्लिक इंटरेक्शन

* जिलों और गाँवो का लगातार दौरा

* योजनाओं की स्वयं निगरानी

वह गवर्नेंस को ब्यूरोक्रेटिक डिस्टेंस से निकालकर पर्सनल आउटरीच मॉडल में बदला।   

आलोचना

लम्बे समय तक शासन करते रहने पर उनके कुछ आलोचक भी हुये। उनका कहना था-

* इंफ्रास्ट्रेक्चर डवलपमेंट ढीला रहा

* अन-एम्पलायमेंट और अर्बन डवलपमेंट पर ध्यान नहीं दिया।

* प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता का अभाव। 

उनके समर्थकों का मानना है- 

* वैलफेयर पॉलिटिक्स के जरिये उन्होंने सोशल स्टेविलिटी बनायी।

* इलेक्टोरल ट्रस्ट बनाये रखा।

2020 की धमाकेदार वापिसी

सन 2020 में सत्ता परिवर्तन हुआ तब का मोड़:

* सत्ता परिवर्तन

* चौहान ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पद संभाला

उनकी वापसी

* Political resilience

* organizational strength

बीजेपी में उनका बढ़ता कद 

राष्ट्रीय राजनीति में

* बीजपी के नेशनल लीडरशिप सर्किल का हिस्सा रहे 

* केन्द्र के साथ को-ऑर्डिनेशन में सक्रिय भूमिका 

* नेशनल पॉलिसी डिस्कशन्स में शामिल

आगे चलकर केन्द्रीय मंत्रीमंडल का हिस्सा बने।

* Short term narratives 

* High-voltage campaigns 

* social media dominance  

विपरीत, उनकी राजनीति

लोंग टर्म वेलफेयर राजनीति-

* इमोशनल कनेक्ट 

* लगातार संवाद पर आधारित रही। 

मध्य प्रदेश राजनीति पर प्रभाव  चौहान ने -

* welfare-centric governance को mainstream बनाया। 

* बीजेपी को ग्रामीण क्षेत्र में मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। 

* Leadership को Administrative Caregiver के रूप में बदला। 

उनकी राजनीति

one Leader dominance era के रूप में देखा जाता है। 

भारतीय राजनीति का वह मॉडल जहाँ सत्ता टिके policy Continuity and emotional Connect से है। वे न Charismatic tender Technocratic administrators वे एक mass welfare politition हैं। 

निष्कर्ष

शिवराज चौहान का जीवन लंबा, प्रभावशाली, संघर्षशील और परिवर्तनशील था।  

उन्होंने सिद्ध किया -

* निरंतर संवाद  

* जन कल्याण योजनाएं 

* संगठनात्मक समर्थन 

मध्य प्रदेश राजनीती में शिवराज सिंह चौहान नाम एक defining era के रूप में दर्ज है।