गुरनाम सिंह भारत की राजनीति के ऐसे चेहरा हैं, जो एक राजनैतिक ही नहीं अपितु एक जन सेवक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने अपने राजनैतिक जीवन को Power नहीं अपितु Public Service के रुप में निर्वाध रुप से जिया। वे ना केवल भाषण देते थे, बल्कि गाँव-गाँव और घर-घर जाकर आम आदमी की समस्याएं सुनते और उनका निराकरण किया करते। उन्होंने लीडरशिप स्किल एवं क्लियर विजन के बूते पर जनता का विश्वास जीता। 

गुरनाम सिंह का जीवन परिचय

गुरनाम सिंह का जन्म एक अत्यंत साधारण परिवार में हुआ था। उन्होंने बचपन से ही संघर्षपूर्ण जीवन का सामना किया। उनकी शिक्षा भी किताबों तक सीमित न होकर किसानों की मजबूरी व मजदूरी की कठिनाइयों को नजदीक से देखकर बहुत कुछ सीखा। यही से उनकी social awareness विकसित हुई। अब उन्होंने तय कर लिया कि वे सिर्फ समाज के लिये ही काम करेंगे।

राजनीतिक सफर

राजनैतिक सफर गुरनाम सिंह का किसी बडे मंच से न होकर जमीन से जुड़कर हुआ। उन्होंने सामाजिक कार्यों में भाग लेते हुये शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े अभियान चलाये । फिर उन्होंने महसूस किया कि वास्तविक बदलाव किसी राजनैतिक प्लेटफार्म से ही संभव है। तब जाकर उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। जहाँ उनका प्रवेश सहज नहीं था। इसके लिये उन्हें संघर्ष करना पड़ा और विरोध भी झेलना पड़ा। समय के साथ-साथ वे मजबूत बनकर उभरे।

उनकी राजनीति का मॉडल - जनता की राजनीति

गुरनाम सिंह की राजनीति Traditional न होकर जन केन्द्रित रही है। राजनीति उनके लिए चुनाव जीतने का साधन न होकर जन केन्द्रित रही है। 

उनकी विचारधारा

* विकास केवल कागजों में नहीं जमीन पर दिखना चाहिये 
* गाँव का विकास देश के विकास की नीव है।
* राजनीति जनता से दूर न होकर जनता के बीच होनी चाहिये 
* सत्ता सेवा के लिये हो, शोषण के लिये नहीं

इसी सोच ने उन्हें Mass Leader बनाया।

उनके प्रमुख मुद्‌दे रहे

किसान कल्याण- किसानों के वे प्रमुख हितेषी रहे।

उनका मानना था कि जब तक इंसान मजबूत नहीं होगा। देश मजबूत नहीं होगा। किसान के मुद्‌दों को लेकर वे सरकारों से भी टकराते रहे।

युवा और रोजगार

यूथ एम्पॉवरमेंट को उन्होंने अपना राजनीतिक आधार बनाया। अपने भाषणों में वे स्किल डवलप‌मेंट, स्टार्टअप्स और एजूकेशन सुधार की बात करते रहे। उनका मानना था कि शिक्षा रोजगार परक होनी चाहिए। 

सामाजिक न्याय

वे आर्थिक भेदभाव और जाति, वर्ग के खिलाफ खुलकर रहे। उनके भाषण में equality केवल नारा न होकर पॉलिसी का हिस्सा रही।

* ईमानदारी

* नम्रता

* सादगी

* भावनात्मक जुडाव

* व्यवहारिक सोच

नेतृत्व

* सबको सुनते

* मामला समझते

* अन्त में निर्णय लेते

वे निर्विवादी लीडर रहे है। उनकी छवि एक 'क्लीन इमेज लीडर' की रही है। जनता का उन्हें भरपूर सपोर्ट मिला है। आज के समय में-

* ब्लाइंड राजनीति नहीं करते

* गुमराह करने वाला वादा नहीं करते

* Public engagement को गंभीरता से लेते

निष्कर्ष

गुरनाम सिंह जनता की सेवा के लिए जनता के लीडर हैं। वे एक नेता न होकर आमजन के लिए सेवा का माध्यम हैं। वे जनता के बीच से निकलकर पूरी तरह जनता के लिये समर्पित लीडर हैं।