महाराष्ट्र प्रान्त को मजबूती देने वाले सामाजिक संतुलन, औघोगिक शक्ति एवं कृषि समृद्धि के नायक थे - यशवंतराव चव्हाण। महाराष्ट्र के प्रथम मुख्यमंत्री चव्हाण का चरित्र - सच्चा नेता वही होता है जो सत्ता को समाज के भविष्य पर निवेश की तरह देखता है।

यशवंत चव्हाण का जीवन परिचय

चव्हाण जी का जन्म 1 मार्च को महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने बचपन में ही किसानों को -

* आर्थिक असुरक्षा से जूझते

* सामाजिक असमानता का दंश

* संसाधनों की भारी कमी

* ग्रामीण जीवन की पीड़ा को झेलते हुये देखा था। 

अतः उनकी राजनीति farmer-centric development and Social justice के आसपास घूमती रही। 

चव्हाण ने कानूनी पढ़ाई पूरी की। समाज के कमजोर वर्गों और किसानों की पीड़ा को वकालत के दौरान उन्हें नजदीक से समझने का मौका मिला। वह- 

* डा. भीम राव अम्बेडकर

* महात्मा गांधी

* समाजवादी विचारधारा से प्रभावित थे।

उनका जीवन मंत्र

"राजनीति सत्ता के लिये नहीं, सामाजिक संतुलन के लिये होनी चाहिये।"

स्वतंत्रता संग्राम

वे स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी रहे। उन्होंने-

ब्रिटिश सरकार विरोधी आंदोलन

* अंग्रेजो भारत छोडो आन्दोलन

* सत्याग्रह जैसे आन्दोलनों में भाग लिया।

इसी दौर ने उनके ब्यक्तित्व को disciplined leader, fearless leader reformer and people-first politician बनाया।

स्वतंत्रता के बाद उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल होकर राजनीतिक पहचान बनाई। उन्हें 

* ग्रामीण मुद्‌दो

* विनम्रता

* जनता से गहरा संवाद

* प्रशासनिक क्षमता की गहरी समझ थी। 

वे क्रेडिविलिटी-बेस्ड राजनीति में भरोसा करते थे।

प्रथम मुख्यमंत्री महाराष्ट्र

महाराष्ट प्रान्त का गठन 1 मई 1960 को हुआ था। महराष्ट्र के प्रथम मुख्यमंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल 1960 से लेकर 1962 तक का रहा। यह एक नये राज्य की नींव रखने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी थी। जिसको कि-

* सामाजिक संतुलन

* औद्योगिक विकास

* प्रशासनिक स्थिरता

* कृषि सुधार के साथ मजबूती से निभाया।

उनकी पहली प्राथमिकता "किसान को आत्मनिर्भर बनाना थी" उन्हें -

* सह‌‌कारी समितियों 

* सिंचाई परियोजनाएं

* ग्रामीण सड़कें

* कृषि ऋण व्यवस्था अपनाकर ग्राउंड वर्क (groundwork) की तैयार की।

औद्योगिक विकास

Future industrial state बनाने की दिशा में कदम  

* MSME को बढ़ावा 

* मुंबई - पुणे बेल्ट का विस्तार

* औद्योगिक क्षेत्र का विकास

इसी कारण महाराष्ट्र फाइनेंसियल और इण्डस्ट्रियल पावर हाउस बना।

सहकारी आन्दोलन

उन्होंने-

* कृषि विपणन समितियां

* सहकारी संस्थाएं 

* दुग्ध सहकारी बैंक स्थापित की। 

महाराष्ट्र में Cooperative economy model इन्हीं की देन है।

शिक्षा व सामाजिक सुधार

* तकनीकी संस्थान

* गरीब छात्रों को छात्रवृत्ति

* कॉलेज व स्कूलों का विस्तार

उनकी शिक्षा नीति- inclusive growth through knowledge 

राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका

भारत सरकार में -

* Defence Minister of India

* Finance Minister of India 

* Home Minister of India 

* एवं उप-प्रधान मंत्री स्तर के लीडर थे।  

चीन से 1962 युद्ध के बाद रक्षामंत्री रहे।

भारतीय सेना के-

* आधुनिकीकरण

* Morale rebuilding 

* Defence preparedness को मजबूती प्रदान की।

व्यक्तित्व

* विनम्र व शांत

* दूरदर्शी

* आत्मसंयमी

* गम्भीर लीडर 

उनकी लीडरशिप स्टाइल-

"Silent strength with strategic vision"

निधन

उनका निधन 25 नवम्बर 1984 को हुआ था। जो राष्ट्र की गम्भीर क्षति थी ।

विरासत जो कि जीवंत है-

* कृषि नीति में

* औद्योगिक विकास में

* राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे में 

महाराष्ट्र में उन्हें राज्य का शिल्पकार कहा जाता है। 

निष्कर्ष

चव्हाण जी का जीवन बताता है -

"महान नेता वही है, जो राज्य की नीव को मज‌बूत करके आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य दे।  

वे याद किए जायेंगे- The architect of modern Maharashtra, a nation-builder and the first visionary chief minister के रूप में।