उत्तर प्रदेश की राजनीति में वीर बहादुर सिंह का नाम बड़े ही आदर के साथ लिया जाता है। वे एक सादगी प्रिय एवं दूरदर्शी नेता रहे है। वे प्रदेश के चौदहवें मुख्यमंत्री रहे थे। उनका कार्यकाल - Modern - इन्फ्रास्टकचर, इंडस्ट्री, एजुकेशन रिफोर्म के लिये जाना जाता है।

वीर बहादुर सिंह का जीवन परिचय

गोरखपुर के जिला बह राइच क्षेत्र में वीर वहादुर सिंह का जन्म 18 फरवरी 1935 को हुआ था। एक साधारण परिवार से वीर बहादुर सिह सम्बन्ध रखते थे।

वीर बहादुर सिंह की शिक्षा

वीर बहादुर सिह (Veer Bahadur Singh) का शिक्षा के क्षेत्र में विद्यालय में मेधावी छात्रों में गिनती की जाती थी। उच्च शिक्षा उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (Allahabad University) से प्राप्त की थी। पढ़ाई के दौरान ही उनमें लीडरशिप क्वालिटीज, पब्लिक इंफेक्शन स्किल्स और एडमिनिस्ट्रेटिव एप्टीट्यूड का विकास हो गया था।

राजनीति

वीर बहादुर सिंह सीधे जनता से जुड़े हुये नेता थे। कांग्रेस पार्टी में पहले वे जिला संगठन फिर प्रदेश कार्यकारिणी में मजबूत पकड बनाई। वे पब्लिक ऑरिन्टेड रिफोर्मर माने जाते थे। 

मुख्यमंत्री

24 सितम्बर 1985 को वें उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री बने। मुख्य मंत्री के रूप में उन्होंने प्रदेश का विकास, सुद्ध  प्रशासनिक व्यवस्था पर जोर दिया।

उपलब्धियां

वीर बहादुर सिंह कि उपलब्धियां निम्नवत हैं।

* शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के अन्तर्गत उन्होंने नये विद्यालयों का सृजन, शिक्षा बजट बढ़ाना, प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति पर जोर दिया।

* औद्योगिक विकास के क्षेत्र में उन्होंने इन्वेस्टमेंट फैण्डली यूपी सिस्टम के तहत कार्य किया। उद्योग स्थापन की सरल प्रक्रिया, विजली सड़क जैसी सुविधाओं का विस्तार, एवं रोजगार पर जोर दिया।

* बुनियादी ढांचे के विस्तार के अन्तर्गत उन्होंने सड़को का निर्माण, विजली के कार्यों को गति प्रदान की वे यूपी की एक मोर्डन एवं कन्कटेड स्टेट बनाना चाहते थे।

* प्रशासनिक क्षमता के अन्तर्गत वे सीधे जनता है। बीच में जाते थे। समस्याएँ सुनते और तुरंत निदान कराते। उनकी शैली Decisive, पारदर्शी थी।

* सामाजिक विकास के अन्तर्गत उन्होंने समाज के सभी वर्गो, किसानों, मजदूरों, युवाओ, गरीबो  के लिये योजनाएं शुरू की। उन‌का मानना था विकास तभी सम्भव है। जब समाज में शांति, स्थिरता और साम जस्य हो।

नेतृत्व शैली

उनके नेतृत्व के प्रमुख गुन जनता से सीधा संवाद सरल व्यवहार, प्रशासनिक क्षमता, निर्णय मे गति, आधुनिक सोच और विकासोन्मुख सोच थे।

राष्ट्रीय राजनीति

राष्ट्रीय राजनीति में वे प्रधान- मंत्री राजीव गांधी के केबिनेट में महत्व भूमिका निभाते हुये एक मार्गदर्शक साबित हुये।

निधन

उनका निधन 30 अप्रैल 1988 को हुआ था। भारतीय राजनीति के लिये यह एक अपूरणीय क्षती थी। एक विकास पुरुष, मजबूत प्रशासक और जनप्रिय नेता के रूप में उन्हें आज भी याद किया जाता है। 

निष्कर्ष

वीर बहादुर सिह एक दूरदर्शी, प्रशासननिक क्षमतावान, विकास पुरुष, आधुनिक सोच वाले लीडर थे।