कल्याण सिंह R. S.S. की पृष्ठभूमि से आये नेता थे। अनुशासन उनके जीवन का अभिन्न अंग था। ग्रामीण परिवेश से निकले कल्याण सिंह वाकपटुता और जनता से सीधे जुड़ाव के कारण जन्मानस में अत्यन्त लोक प्रिय हो गये थे। वे दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। राजस्थान एवं हिमाचल प्रदेश के गवर्नर भी रहे। उनकी कार्य शैली में clarity, discipline और एक दृड़ता झलकी झलकती थी।

कल्याण सिंह का जीवन परिचय

कल्याण सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के मुरलीगंज ग्राम में हुआ था। एक किसान परिवार में जन्मे कल्याण सिंह ने साधारण बचपन जिया था। परिवार से मिले संस्कार ही थे कि उनका रुझान हमेशा शिक्षा की तरफ रहा। भाषण शैली और समाज में कुछ करने इच्छा ने उन्हें लोकप्रिंय बना दिया।

R. S. S से जुड़ाव

वयस्क होने के साथ ही कल्याण सिंह R.S.S. से जुड़ गये। संगठन के सिद्धान्तों ने उन्हें समाज सेवा अनुशासन और राष्ट्रवाद की ओर मोड़ दिया।

राजनैतिक जीवन

कल्यान सिंह 1967 में पहली बार विधायक बने। बस यही से उनके राजनैतिक जीवन की शुरुआत हो जाती है। वे प्रदेश के मुख्य मंत्री व राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के गवर्नर रहे। उनकी साफ सुधरी छवि और पारदर्शी नीतियों ने उन्हें जनता का प्रिय बना दिया। 

मुख्य मंत्रीकाल

* प्रथम कार्यकाल

उनका पहला कार्यकाल मुख्यमंत्री के रूप में 1991 से 1992 तक का रहा। वे एक तेज निर्णय क्षमता व सख्त कानून ब्यवस्था के लिए जाने जाते थे। 

अयोध्या की घटना

उनके पहले कार्यकाल में ही अयोध्या की घटना घटित हो गयी। पर वे अपने निर्णय पर अडिग रहे। इसके लिए उन्हें राजनैतिक परिणाम भी झेलने पड़े। 

द्वितीय कार्यकाल

उनका मुख्यमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल 1997 से लेकर 1999 तक का रहा। उनकी प्रशासनिक शैली को strict but fair माना गया। जनता की समस्या का तुरंत समाधान करते थे।

एक जननायक

कल्याण सिंह कहते थे - "नेता वही है जो जनता के बीच रहे, जनता के बीच उठे बैठे और जनता के दुःख सुख में सामिल हो।" वे vip कल्चर से दूर रहने वाले जनता के बीच बैठने वाले नेता थे। उनकी अनोखी Human touch ने उन्हें एक दुर्लभ नेता बनाया।

राज्यपाल के रूप में

राज्यपाल की भूमिका में वे संविधान के अनुरूप कार्य करते दिखे। गवर्नर रहते हुये भी अपने कार्यों की वजह से जनता के बीच में अत्यन्त लोकप्रिय रहे।

व्यक्तित्व

कल्याण सिंह का व्यक्तित्व-

* एक दृढ राष्ट्रवादी

* कठोर निर्णय लेने वाला लीडर

* सभी समुदाय का सम्मान

* जनता की समस्याओं को समझकर निराकण

* अनुशासित 

* संवेदन शीलता

* एक आदर्श नेता बनाती है

निधन

कल्याण सिंह का निधन 21 August 2021 को हुआ था। यह एक अपूरणीय क्षती थी। उनके निधन पर उमड़े जन मानस ने एहसास कराया कि वे जनता के बीच कितने लोक प्रिय थे। उनकी ईमानदार राजनीति, स्पष्ट विचारधारा, साहसिक निर्णय विरासत में शामिल थे।

निष्कर्ष

जनता की भाषा बोलने वाले, पारदर्शी राजनीति सिद्धान्तो को वरीयता,  जमीन से जुड़ाव, राष्ट्रवादी विचारधारा ने कल्याण सिंह को एक विशिष्ट पहचान दिलायी।