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स्वतंत्र भारत के प्रधान मंत्रियों ने देश को आगे बढ़ाने के लिये अद्वितीय कार्य किये। उन्ही में से एक प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में देश को गति प्रदान करने के लिये कार्य किये। उन्होंने अपने कार्यकाल में देश को आर्थिक संकट से उबारने का कार्य किया।
पी • वी • नरसिम्हा राव का जीवन परिचय
पी•वी• नरसिम्हा राव (P. V. Narasimha Rao) का जन्म 28 जून सन् 1921 को तेलंगाना के लक्ष्मापुरम गाँव में हुआ था। उस समय तेलंगाना का यह गाँव हैदराबाद में हुआ करता था
पी • वी • नरसिम्हा राव की शिक्षा
नरसिम्हाराव ने उस्मानिया विश्वविद्यालय (Osmania University) से स्नातक कि डिग्री प्राप्त की। इसके बाद नागपुर विश्वविद्यालय (Nagpur University) से कानून की डिग्री (Law Degree) ली। राव लगभग 15 भाषाओं के ज्ञाता थे। जिनमें हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी, फारसी, स्पेनिश आदि सम्मिलित हैं।
पी • वी • नरसिम्हा राव का राजनैतिक जीवन
सर्वप्रथम वे कांग्रेस पार्टी से जुडे थे। 1957 में वे पहली बार आन्ध्र प्रदेश से विधानसभा के लिये चुने गये। बाद में वे आन्ध्र प्रदेश के मुख्य मंत्री बने। अपने कार्यकाल से उन्होंने शिक्षा का प्रसार, भूमि सुधार और ग्रामीण विकास के कार्य किये।
प्रधानमंत्रित्व काल (Prime Minister of India)
सन् 1991 में जब एक आतंकी हमले में प्रधान मंत्री राजीव गांधी की निर्मम हत्या हो गयी थी तो देश में अनिश्चतता का माहौल पैदा हो गया था। तो पीवी नरसिम्हा राव को 70 वर्ष की उम्र में नौवा प्रधानमंत्री बनाया गया। इस विषम परिस्थति में भी अल्पमत होते हुये उन्होंन पाँच वर्ष अपनी सरकार चलायी। यह उनकी दूरदर्शित को सिद्ध करता है।
आर्थिक सुधार
भयंकर आर्थिक संकट झेल रहे देश में 1991 में उन्होंने प्रमुख अर्थशास्त्री डा० मनमोहन सिंह को उन्होंने अपनी सरकार में वित्तमंत्री बनाया।
उनके मुख्य आर्थिक सुधार इस प्रकार थे__ Liberalization के अन्तर्गत निजी क्षेत्र को बढ़ावा दिया।
* Privatization के अंतर्गत सरकारी नियंत्रण में चल रही कम्पनियों का निजीकरण किया।
* Globalization के अंतर्गत विदेशी निवेश और व्यापार के लिये भारत के रास्ते खोले ।
* Industrial Policy Reforms के अन्तर्गत सुधार करके लाइसेंसी राज खत्म किया।
विदेश नीति
अपने कार्यकाल में वे विदेश नीति को नई उचाईयों पर ले गये। उन्होंने एशियाई देशों की ओर अपना रुख किया। जिससे भारत का दक्षिण पूर्व एशियाई देशो के साथ व्यापार बढ़ा। इसके साथ-साथ अमेरिका और रुस से भी ब्यापारिक सम्बन्ध स्थापित किये।
सामाजिक सुधार के कार्य
नरसिम्हा राव ने सामाजिक सुधारो के लिये शिक्षा के क्षेत्र को महत्व दिया। उन्होंने सामाजिक सुधार के क्षेत्र में निम्न कार्य किए।
* उच्चशिक्षा (higher education) के लिये तकनीक ससंस्थानों का विस्तार किया।
* ग्रामीण शिक्षा के लिये ऑपरेशन ब्लैक - बोर्ड (Operation Blackboard) कार्यक्रम चलाये
* भारतीय भाषाओं का प्रचार-प्रसार कराया।
* महिला सशक्तिकर और अल्प संख्यक योजनाएँ क्रियान्वित की
व्यक्तित्व
नरसिम्हाराव एक शांत, विनम और विचारशील व्यक्ति थे। देश हित में वे कड़े निर्णय लेने वाली शख्सियत थे। उन्हें "चाणक्य आफ मॉर्डन इंडिया" ऐसे ही नही कहा जाता।
निधन
नरसिम्हा राव का विधन 23 दिसम्बर 2004 को नई दिल्ली में हुआ था।
निष्कर्ष
नरसिम्हा राव संकट के समय धैर्यता, दूरदर्शिता, और साहस के प्रतीक थे। वे एक सच्चे लीडर, विजनरी और अर्थशास्त्री एवं रिफोर्म प्राइम मिनिस्टर आफ इण्डिया के रूप में जाने जाते हैं।