भारत और अमेरिका के बीच बहुचर्चित ट्रेड एग्रीमेंट आखिर फरवरी 2026 में हो ही गया। इस एग्रीमेंट का सर्वाधिक चर्चित कृषि क्षेत्र है। जो कि आजिविका, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता से सीधे जुड़ा हुआ है।
इस Agreement के अन्तर्गत अमेरिकी सरकार ने भारतीय उत्पादों से टैरिफ को घटाकर 25% से 18% कर दिया है। जब कि भारत ने अमेरिकन कृषि उत्पादों के लिये भारत में आंशिक रूप से प्रवेश की अनुमति दी है। यही बहस का मुद्दा है कि ट्रेड डील असंतुलित है या संतुलित।
अमेरिका के लिए यह डील आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Agricultural trade deficit को अमेरिका कम करने के प्रयास में या जोकि वर्ष 2024 में लगभग 51.3 विलियन तक पहुंच गया था इस समझौते के बाद -
* मक्का
* सोयाबीन
* इथानॉल और पशु फीड़ प्रोडक्ट्स जैसे अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिये भारत एक बड़ा बाजार हो सकता है। इसमें अमेरिकी कृषि विभाग और प्रशासन का तर्क -
* फार्म इनकम में वृद्धि होगी।
* अमेरिका के ग्रामीण इको नामी को मजबूती मिलेगी
* ग्लोबल सप्लाई चेन में अमेरिकन स्थिति को मजबूती मिलेगी। अमेरिका इस डील को स्ट्रेटजिक इकोनोमिक expansion के रूप में देख रहा है।
भारत इसको सिर्फ आयात के रूप में न देखकर संभावित लाभों को देख रही है।
टैरिफ कटौती से -
* टैक्सटाइल
* गेम्स और ज्वैलरी
* हेण्डी क्राफ्ट्स
* कुछ एग्रो- प्रोसेसड प्रोडक्टस को अमेरिकी बाजार में राहत मिलेगी। केरीफ घटने से भारतीय उत्पादों कि स्पर्धा अमेरिकी बाजार में कम होगी।
* एडवांस स्टोरेज सिस्टम
* एनर्जी रिसोर्स तक भारत की पहुंच आसान मानी जा रही है। जिससे निर्यात को समर्थन मिलेगा। इसके अलावा-
* अमेरिकी एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी
भारत में कृषि एक गतिविधिन न होकर करोड़ो परिवारों कि आजीविका का साधन है।
1. सब्सिडी असमानता
अमेरिका अपने किसानों को डाइरेक्ट इनकम सपोर्ट, फसल बीमा, और एक्सपोर्ट इनसेंटिव जैसी छूट देता है। जब कि भारतीय किसान सीमित संसाधनों, मौसम की निर्भरता, और कम MSP पर उत्पादन करता है। यदि अमेरिकी मक्का या सोयाबीन कम रेट पर भारतीय बाजार में आते है तो भारतीय किसानों को प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो जायेगा।
2. डेयरी क्षेत्र
भारत का डेयरी क्षेत्र विश्व में सबसे बड़ा है। और यह-
* स्माल फारमर्स
* लैण्डलैस हाउस होल्ड
* वोमेन - लैड को-ऑपरेटिव्स है।
इस डील के भविष्य में विस्तार के बाद -
* मिल्क पाउडर
* चीज
* प्रोसेसिस्ड डेयरी प्रोडक्ट को छूट मिलने पर लाखो छोटे पशु- पालकों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
3. खाद्य सुरक्षा
भारत में फूड सिक्योरिटी पॉलिसी सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सरकारी खरीद आधारित है। यदि विदेशी खरीद पर निर्भरता बढी तो-
* domestic Procurement pressure में बदलाव होगा।
* गवर्नमेंट सब्सिडी burden में वृद्धि होगी।
* Long-term self- sufficiency पर सवाल।
इसके अंतरिक्त खादय सुरक्षा कानून को बनाये रखने पर सरकार पर वित्तीय भार बढ़ेगा। जिसका अपत्यक्ष लाभ विदेशी उत्पादकों को हो सकता है।
भारत सरकार का कहना है-
* समझौतों में सेफगार्ड Mechanisms शामिल है।
* सेंसेटिव सेक्टर को चरणबद्ध तरीके से खोला जायेगा। वैसे इन प्रावधानों की परीक्षा इम्पलीमेन्टेशन स्टेज में होगी।
* इम्पोर्ट Surge की दशा में corrective step लिये जा सकते है।
भारत-अमेरिका समझौता जोखिम भरा है। समझौता तभी सफल माना जायेगा जब एक्सपोर्ट गेन वास्तविक हो, डोमेस्टिक फारमर्स को सुरक्षा मिले और फ़ूड सिक्योरिटी कम्प्रोमाइज्ड नही। इसका उद्देश्य कि डिफेक्ट सतुलित करना न होकर समान और टिकाऊ विकास होना चाहिये।