भारतीय नागरिक उड्डयन क्षेत्र के एक निर्णय से देश के लगभग 70 हवाई अड्डों से सेन्ट्रल इण्डस्ट्रयल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) के जवानों को हटाकर उनकी जगह प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड तैनात किये जाने की योजना है। यह भारत में Aviation Security व्यवस्था, आर्थिक प्राथमिकता, एवं संसाधन प्रबन्धन में बदलाव का संकेत है।
आज भारत का aviation Seetor तीव्र गति से विस्तार कर रहा है, जिसमें नये एअरपोर्टस का निर्माण, क्षेत्रीय कनैक्टिवटी का विस्तार एवं यात्रियों की बढ़ती संख्या ने सुरक्षा व्यवस्था को जटिल बना दिया है। ऐसे में भारत सरकार ने hybrid security model अपना कर सरकारी फोर्स और प्राईवेट एजेन्सी दोनों की भूमिका तय की जा रही है।
भारतीय एअरपोर्टों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लम्बे समय से CISF के हाथों, ही रही है। इस बल ने कई संवेदन सील स्थितियों में अपनी दक्षता साबित की है CISF हवाई अड्डों पर यात्रियों की चैंकिग, सर्विस लास एक्सएसकंट्रोल, anti-sabotage, Checks और एमरजेंसी रेस्पॉन्स जैसी संवेदनसील जिम्मेदारियां भी निभायी है। उनकी है ट्रेनिंग में हवाई रिस्क Scenarios, आतंकवाद रोधी उपाय और तकनीकी उपकरणों का उपयोग भी शमील होता है।
बदलाव क्यों?
देश में गतवर्षो से रीजनल कनेक्टिवटी स्कीम (RCS) के अन्तर्गत छोटे और मध्यम स्तर के एअरपोर्ट विकसित किये गये हैं। जिन पर यात्रियों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, जिससे कि CISF की तैनाती को आर्थिक दृष्टि से चुनौती पूर्ण गाना जा रहा है। इसके अलावा CISF को क्रिटिकल सेम्टर्स जैसे मैट्रो सिस्टम, न्यूकिलियर प्लांट, स्पेस installations एवं इंडस्ट्रियल यूनिट की भी सुरक्षा करनी होती है। अतः हर छोटी एअरपोर्ट पर CISF की तैनाती करना व्यवहारिक नही है।
* नयी व्यवस्था के तहत प्राइवेट सिक्योरिटी एजेन्सी पूरी तरह काम करने को स्वतंत्र नहीं होगी। इन्हें Bureau of civil aviation सिक्योरिटी (BCAS) के कई दिशा निर्देशो के तहत कार्य करना होगा
* प्राइवेट गाई को एविएशन - स्पेसीफिक ट्रेनिंग, जिसमें स्क्रीनिंग टेक्निक, विहेवीटल एनालाइसिस, इमरजेन्सी हेलिग, और उपकरणों के उपयोग की जानकारी दी जाएगी।
* इस मोडल में हयूमन रिसोर्सिंग के साथ टेक्नोलोजी का बहुतायत से उपयोग, CCTV सर्विसलांस, बायोमैट्रिक एक्सएस कण्ट्रोल, ऑटोमेटेड स्किनिंग सिस्टम और इंटेलिज़ेंटा को ओर्डिनेशन को व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।
आर्थिक लागत में कमी
CISF जवानों की तैनाती में सरकार वेतन भन्ते, आवास, चिकित्सा सुविधा और ट्रेनिग पर भारी खर्च करती है। प्राइवेट सुरक्षागार्ड तैनात करने पर आर्थिक बोझ कम होगा इसके अलावा पब्लिक- प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा मिलेगा जो आज के इन्फास्ट्रक्चर डवलमेंट का आधार है।
सुरक्षा चुनौती
इस बदलाव को लेकर गंभीर आलोचना भी हो रही है। एविएसन सिक्योरटी एक संवेदनशील क्षेत्र है। एक चूक गंभीर परिणाम दे सकती है। CISF जवान अनुभवी और प्रशिक्षित होते हैं। प्राइवेट गाई की जवाबदेही सरकारी बलों की तुलना से अलग होती है। Incident की स्तिथि में जबाव देही तय करना जटिल हो सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय अनुभव
विकसित देशों में Mixed model पहले से ही लागू है। यूरोप के कई देशो में प्राइवेट एजेन्सीज को भी सुरक्षा में शामिल किया गया है। हालांकि देश की विवधता, जनसंख्या घनत्व, क्षेत्रीय असमानता इस मोडल को लागू करने में अतरिक्त सावधानी की मांग करती है।
भविष्य की चुनौती और संभावनाएं
सरकार के लिए चुनीती होगी कि नये मॉडल को प्रभावी ढंग से लागू करे। सुरक्षा मानको में कमी न हो। ट्रेनिंग, मॉनिटरिंग ,अकाउंटेबिलिटी और टेक्नोलॉजी जैसे पहलुओं पर ध्यान देना होगा यात्रियों का विश्वास जीतना होगा।
एअरपोर्ट से CISF जवानों को हटा - कर प्राइवेट सुरक्षा गार्ड तैनात करना आर्थिक लाभ तो है परन्तु सुरक्षा जोखिम को नजर अंदाज नही किया जा सकता।
सरकार उच्चतम मानक बनाकर इसे संतुलित और प्रभावी तरीके से लागू करें तो देश के एविएसन सेक्टर को नयी दिशा दे सकता है।