* सैलरी के बढ़ने से पहले कर्मचारियों को झटका
* सरकार का इस मामले पर साफ इन्कार

केन्द्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशन भोगियों को हर बार की तरह इस बार भी नया वेतनमान लागू होने पर उम्मीद की जा रही थी कि नया वेतन आयोग लागू होगा तो सैलरी में अच्छी खासी बढ़त मिलेगी। मगर इस बीच आयी एक खबर ने कर्मचारियों के अरमानों पर पानी फेर दिया। जिसे कर्मचारियों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

पूरा मामला क्या है?

कर्मचारी संगठनों की ओर से मांग उठाई जा रही थी कि आयोग के गठन से पहले फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाया जाया । परन्तु सरकार ने इस मांग को मानने से साफ इन्कार कर दिया। जिसे कर्मचारियों के लिये एक झटका माना जा रहा है

क्या है फिटमेंट फैक्टर?

फिटमेंट फैक्टर वह आधार होता है जिसके तहत कर्मचारियों की बेसिक सैलरी तय होती है। वर्तमान में यह 2.57 गुना है। कर्मचारी संगठन इसको 3.68 या उससे अधिक करने की मांग कर रहे थे।

क्या है सरकार का मानना

सरकार का मानना है कि वेतन में संशोधन का उचित समय वेतन आयोग के माध्यम से ही आता है, उससे पहले इस तरह का बदलाव उचित नहीं है। साथ ही सरकार का कहना है कि आर्थिक संतुलन बनाये रखना भी जरुरी है। अचानक बडे स्तर पर वेतन वृद्धि से सरकारी खजाने पर दबाब पड़ सकता है

कर्मचारियों में नाराजगी

सरकार के इस फैसले को लेकर कर्मचारी संगठनों में नाराजगी है। उनका कहना है कि महंगाई के अनुपात में वेतन नहीं बढ़ रहा है। डीए की बढ़ोतरी अस्थायी राहत होती है जबकि फिटमेंट फैक्टर की बढोत्तरी स्थायी समाधान होती है अगर सरकार उनकी माँगो पर गौर नहीं करती है तो वे विरोध प्रदर्शन कर सकते है

आठवे वेतन आयोग की स्थिति

माना जा रहा है कि सातवें वेतन आयोग की अवधि 2026 तक है। उसके बाद ही आठवें वेतन आयोग पर फैसला लिया जायेगा। पिछले अनुभवों के आधार पर हर दसवर्ष में नया वेतन आयोग लागू होता है। मगर सरकार की चुप्पी से जाहिर होता है कि कर्मचारियों को थोड़ा और इन्तजार करना होगा

वेतन और मंहगाई का संतुलन

आज के दौर में महंगाई खाने-पीने की चीजों से लेकर शिक्षा, स्वास्थय और आवास तक चरम पर है। ऐसे में कर्मचारियों की मांग जायज लगती है। वही सरकार के सामने भी आर्थिक चुनौतियाँ है। कोविड - 19 महामारी के बाद अर्थव्यवस्था को संभालना, इन्फास्ट्रेक्चर पर खर्च बढ़ना, सामाजिक योजनाएँ जारी रखना, इन सबको लेकर संतुलन बनाना आसान नहीं है। सरकार किसी बड़े वित्तीय फैसले को लेकर सतर्कता बरत रही है

डीए की राहत पर्याप्त नही

सरकार समय-समय पर डीए में वृद्धि कर राहत देती रहती है। अभी हाल में डीए में वृद्धि की गयी है जिससे कुछ हद तक राहत मिली है। लेकिन यह स्थायी समाधान नही है। विशेषज्ञ मानते है कि डीए में वृद्धि महगाई के अनुसार होती है। ऐसे मे लंबी अवधि में कर्मचारियों की आय में इसका सीमित असर होता है। अतः फिटमेंट फेक्टर को ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है

भविष्य की सम्भावनाएँ

सरकार ने अभी फिटमेंट फेक्टर बढ़ाने से इन्कार कर दिया है, परन्तु भविष्य में परिस्थितियों वस इसमें बदलाव सम्मव है। महंगाई और आर्थिक दबाब बढ़ने पर सरकार को अपने रुख पर बदलाव करना पड़ सकता है। अलावा इसके आठवें वेतन आयोग गठन के बाद सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव होगा जिससे कर्मचारियों की आय में अच्छा खासा इजाफा हो सकता है

निष्कर्ष

आठवें वेतमान आयोग को लेकर कर्मचारियों की काफी उम्मीद है। परन्तु वर्तमान में सरकार के इन्कार के बाद कर्मचारियों को निराशा हाथ लगी है। परन्तु भविष्य में सरकार कर्मचारियो के हित में फैसला ले सकती है। किन्तु अभी कर्मचारियों को धैर्य रखना होगा और आने वाले समय का इन्तजार करना होगा