Table of Contents
- फ्लाइट्स रद्द होने का कारण
- यात्रियों की यात्रा प्रभावित
- क्यों नही मिलता पूरा पैसा, फ्लाइट रद्द होने पर
- यात्रियों को मिलने वाले विकल्प
- * फ्री - रीबुकिंग
- कैसे यात्रियों को ज्यादा नुकसान होता है
- * यदि नोन - रिफन्डेबल टिकिट खरीदी हो तो
- यात्रियों को आवश्यक सलाह
- मिडिल ईस्ट की स्थित का वैश्विक एअर ट्रेवल पर नकारात्म असर
- यदि मिडिल ईस्ट में तनाव जारी रहता है तो एअरलाइन्स को लम्बा रूट लेना पड़ सकता है।
- निष्कर्ष
* फ्लाइट कैंसिल होने पर नही मिलेगा एक भी रुपया
* ईरान तनाव से यात्रियों को झटका
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कई देशों ने अपने एअर स्पेस में हवाई उड़ानों को बंद या सीमित कर दिया है। इस सब के चलते विश्व भर की एअरलाइन्स पॉलिसी के अनुसार हवाई उड़ाने या तो रद्द कर दी है या फिर हवाई उडान के रूट डायवर्ट कर दिये है। ऐसी परिस्थितियों में यात्रियों की परेशानी बहुत अधिक बढ़ गई है। एअरलाइन्स पालिसी के अनुसार फ्लाइट कैंसिल होने पर यात्रियों को तुरन्त रिफन्ड या मुआवजा नहीं मिलता।
फ्लाइट्स रद्द होने का कारण
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरे मिडिल ईस्ट पर दिखाई दे रहा है। जब किसी क्षेत्र में युद्ध या सैन्य गतिविधियां तेज होती है तो युद्ध का खतरा बढ़ जाता है। तो ऐसी स्थिति में एअर लाइन्स सुरक्षा के मद्देनजर वहाँ उस क्षेत्र से अपनी उडाने अस्थायी रूप से बन्द कर देते हैं। या वैकल्पिक मार्ग अपनाते है। यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच यात्रा करने वाले विमान मिडिल ईस्ट से होकर ही गुजरते है।
यात्रियों की यात्रा प्रभावित
जब उडान रद्द होती है या रूट डायवर्ट किया जाता है तो यात्रियो की यात्रा प्रभावित होती है। इससे यात्रियों को मानसिक, आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वही एअर लाइन्स का कहना है कि यात्रियों और क्रू मेंम्बर्स की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है। अतः ऐसे निर्णय लेना अत्यन्त आवश्यक हो जाता है। इनमें एशिया, यूरोप और भारत से जाने वाली फ्लाइट शामिल हैं।
क्यों नही मिलता पूरा पैसा, फ्लाइट रद्द होने पर
वास्तव में, एअरलाइन इंडस्ट्री में एक विशेष नियम होता है, जिसे 'फोर्स मेजर' कहा जाता है।
इस नियम के अन्तर्गत उडान रद्द होने पर एअरलाइन मुआवजा देने को बाध्य नही होती
* युद्ध या सैन्य संघर्ष
* प्राकृतिक आपदा
* एअर स्पेस बन्द होना
* राजनैतिक या सुरक्षा संकट
ऐसी परस्थिति में एअरलाइन मुआवजा देने के बजाय बैंकल्पिक विकल्प देती है।
यात्रियों को मिलने वाले विकल्प
* फ्री - रीबुकिंग
यात्री बिना कोई अतरिक्त शुल्क दिये अन्य तारीख या फ्लाइट में अपनी यात्रा शिप्ट कर सकते हैं।
* ट्रेवल वाउचर
कुछ एअरलाइन्स आगामी यात्रा हेतु ट्रेवल वाउचर देती है। जिसका इस्तेमाल बाद में टिकट बुक कराने में किया जा सकता है।
* सीमित रिफन्ड
कुछ एक मामलों में टिकट का पैसा वापस मिल जाता है। यह एयरलाइन्स की पॉलिसी और टिकट के प्रकार पर निर्भर करता है।
कैसे यात्रियों को ज्यादा नुकसान होता है
* यदि नोन - रिफन्डेबल टिकिट खरीदी हो तो
* यदि टिकिट ट्रेवल एजेन्ट के माध्यम से बुक कराया हो तो
* यदि कनेक्टिंग फ्लाइट्स ली हो तो
यात्रियों को आवश्यक सलाह
* यात्रा से पहले फ्लाइट स्टेटस जरूर चैक करें।
* एअरपोर्ट जाने से पहले चेक कर लें कि फ्लाइट चालू है या नहीं।
* एअरलाइन की आधिकारिक वेवसाइट या ऐप से अपडेट जरूर लें।
* टिकट कैंसिल खुद करने से पहले एयरलाइन की पॉलिसी अवश्य पढ़ें।
मिडिल ईस्ट की स्थित का वैश्विक एअर ट्रेवल पर नकारात्म असर
यदि मिडिल ईस्ट में तनाव जारी रहता है तो एअरलाइन्स को लम्बा रूट लेना पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में-
* उड़ान का समय बढ़ेगा।
* समय बढ़ेगा तो ईंधन अधिक खर्च होगा।
* ईधन अधिक खर्च होगा तो टिकट की कीमतें बढ़ेंगी।
निष्कर्ष
मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते फ्लाइट्स रद्द हो रही हैं। अत: यात्रियों को तुरुन्त रिफन्ड या मुआवजा मिलना मुश्किल हो गया है। ऐसा स्थिति में यात्री एअरलाइन के नियमों को समझ कर आधिकारिक जानकारी के आधार पर निर्णय ले। अगर संकट लंबा चलता है तो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर संकट और भी गहरा हो सकता है।