राज्य सभा के डिप्टी लीडर पद से राघव चड्डा का हटाया जाना क्या आम आदमी पार्टी में दरार के रूप में देखा जा सकता है? या फिर ये केवल संगठनात्मक बदलाव है। राजनैतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ। - मामला क्या है?
राज्य सभा सचिवालय में आम आदमी पार्टी द्वारा आधिकारिक रूप से पत्र भेजकर राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाने की जानकारी दी |
* राघव चड्डा को हटाकर अशोक कुमार मित्तल को डिप्टी लीडर बनाया।
* पत्र में यह भी कहा गया कि अब राघव चड्डा को पार्टी की ओर से सदन में बोलने का समय न दिया जाये ।
इससे राघव चड्डा की संसदीय भूमिका सीमित की गयी है।
पार्टी की ओर से कोई अधिकारिक कारण सामने नही आया किन्तु राजनैतिक विश्लेषण और भी डिया रिपोर्टस के अनुसार कुछ सम्भावानाएं बनती हैं
1- पार्टी नेतृत्व से मतभेद
सूत्रों की माने तो शीर्ष नेतृत्व खासकर अरविन्द केजरीवाल के साथ मतभेद हो सकते हैं। परन्तु इसकी अभी पुष्टि नही हुई है।
2- पार्टी गतविधियों से दूरी
चड्डा पार्टी कार्यक्रमों मे कम सक्रिय थे।
3- बदलाव
संभव यह भी है कि पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव कर नये चेहरों को मौका दे रही हो
कुछ संकेत ऐसी चर्चा को जन्म दे रहे हैं
* चढा के बोलने पर रोक
* महत्वपूर्ण पद से पदच्युत करना
* सार्वनिक रुप से सक्रिय न होना।
इस सबसे अंदाजा लगाया जा रहा है कि पार्टी में दरार है। हालांकि यह आंतरिक पुर्नगठन का हिस्सा भी हो सकता है।
इसका असर
* संसद में
चड्डा एक प्रभावशाली वक्ता माने जाते है। उनके कम सक्रिय होने से राज्य सभा में आप पार्टी की आवाज कमजोर पड़ सकती है।
* विपक्ष की राजनीति पर
इस निर्णय पर विपक्ष को निशाना साधने का मौका मिला है। इससे पार्टी की छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
* पार्टी के भीतर
इस निर्णय से पार्टी के अन्य नेताओ के लिए एक संदेश हो सकता है कि अनुशासन और सक्रियता बेहद जरूरी है।
चड्डा को डिप्टी लीडर, पद से हटाना एक राजनैतिक फैसला हो सकता है, परन्तु - * इसे अधिकारिक रूप से पार्टी में दरार नही कहा गया हैं |
* कोई स्पष्ट कारण अभी नही है।
* रणनीतिक बदलाव भी ने सकता है।
अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है। भविष्य बताएगा कि यह संगठनात्मक बदलाव है। या कुछ और |