पूरे देश में 15 मई 2026 से पेट्रोल डीजल और CNG की कीमतों में बढोत्तरी कर दी गयी है तेल कम्पनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रूपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की है। जबकि दिल्ली NCR में CNG में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है। बड़ी हुई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।
नयी कीमतें क्या हैं?
दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत लगभग 97.77 रूपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 90.67 रूपये प्रति लीटर हो गयी है वही CNG की कीमत 79.09 रूपये प्रति किलो हो गयी है। मुंबई में CNG की कीमत 84 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
ईधन के दाम क्यों बढ़े?
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ईरान अमेरिका संघर्ष और होर्मूज जलडमरूमध्य में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। क्रूड आयल 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर से ऊपर पहुंच गया है। जिससे भारतीय तेल कंपनियों पर भारी दबाव बढ़ गया है। इससे सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। जिसकी वजह से कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया गया।
आम जनता पर होने वाला असर
बढ़ती हुई ईधन की कीमतों से ट्रांसपोर्ट खर्चा बढ़ेगा जिससे वस्तुएँ महँगी होंगी CNG महँगी होने से ऑटो और कैब चलाकों की लागत भी बढ़ जायेगी।
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया
खनिज तेलों की कीमत में बढ़ोत्तरी के बाद सोशल मीडिया पर मीम्स और प्रतिक्रियाओं की बाढ़ ही आ गई है। लोगों ने साइकिल, घोड़ा गाड़ी और पैदल यात्रा जैसे मज़ेदार मीम्स शेयर कर सरकार पर तंज कसा है।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
ईधन की कीमतों में बढ़ोत्तरी होने से विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का बैठे बिठाए मौका मिल गया है विपक्षीय नेताओं का कहना है कि महंगाई बढ़ने से आम आदमी की कमर टूट रही है।
आगे और बढ़ सकते है दाम
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊँची बनी रही तो आने वाले दिनों में पेट्रोल डीजल गैस के दाम और बढ़ सकते है। सरकार अब हर 15 दिन में ईंधन की कीमतों की समीक्षा करने की नीति पर काम कर रही है।
निष्कर्ष
भारत विश्व में सर्वाधिक कच्चा तेल आयातित करने वाले देशों में दूसरे नम्बर पर आता है जिससे खजाने पर भारी मात्रा में बोझ पड़ता है यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती है तो सरकारी खजाने पर अपेक्षा क्रत कम बोझ पड़ता है और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी होने से सरकारी खजाने का एक बढ़ा हिस्सा तेल आयातित करने में ही चला जाता है। अतः मजबूर होकर सरकार को ईंधन के दामों में वृद्धि करनी पड़ती है।