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* एक वर्ष तक सोना ना खरीदें देशवासी
* मध्य पूर्व तनाव और बढ़ते तेल संकट के बीच सरकार की चिंता
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से कम से कम एक वर्ष तक सोना ना खरीदने की अपील की है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल संकट के कारण भारत कि अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव के चलते यह अपील कि गयी है सरकार का मानना है की यदि लोग बड़े पैमाने पर सोना खरीदते है तो इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
भारत दुनियां के सबसे बड़े सोना आयात करने वाले देशों में से एक है। प्रति वर्ष लाखों टन सोना विदेशों से आयात किया जाता है, बदले में भारी मात्रा में डॉलर खर्च करने पड़ते है। अब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती है और साथ ही सोने का आयात भी अधिक होता है, तब देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से प्रभावित होने लगता है।
क्यों महत्वपूर्ण है विदेशी मुद्रा भंडार?
किसी भी देश का विदेशी मुद्रा भंडार उस देश के लिये महत्वपूर्ण आर्थिक ताकत होता है। विदेशी मुद्रा भंडार के उपयोग से अंतराष्ट्रीय व्यापार, आयात भुगतान और आर्थिक संकट के समय देश की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए किया जाता है। भारत अपनी तेल कि जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशों को डॉलर में भुगतान करता है। इस तरह विदेशी मुद्रा भंडार कम होने लगे तो इसका सीधा असर भारतीय रूपये की कीमत पर पड़ता है। रूपये के कमजोर होने से पेट्रोल-डीजल, गैस, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित वस्तुएँ महँगी हो जाती है। इससे आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ जाता है।
भारत में सोने की बढ़ती मांग
भारत में सोना परम्परा, निवेश और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है, विवाह शादी, त्यौहारों और विशेष अवसरों पर सोने की खरीददारी भारतीय संस्कृति का हिस्सा है अतः आर्थिक संकट के समय भी सोने की मांग में बड़ी कमी नही आती विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में अत्यधिक सोना खरीदना देश की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। अतः सरकार चाहती है कि लोग फिलहाल सोने की खरीद कम करके अपनी बचत को अन्य निवेश विकल्पों में लगाएं।
मध्य पूर्व संकट का भारत पर पड़ता असर
मिडिल ईस्ट विश्व के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में है यदि वहा तनाव बढ़ता है या युद्ध जैसी स्तिथि बनती है तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़ती है। भारत जैसे आयातक देश के लिए यह स्तिथि चिंता का कारण बन जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि तेल की कीमतों में इजाफा होता है और साथ ही सोने का आयात भी लगातार बढ़ता है तो भारत को व्यापार घाटे का सामना करना पड़ सकता है इससे विदेशी निवेश पर असर पड़ता है और आर्थिक विकास दर धीमी पड़ जाती है।
वैकल्पिक निवेश के विकल्प
सरकार और वित्तीय विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार लोग वर्तमान में सोने की बजाय अन्य निवेश विकल्पों पर ध्यान दें। जो कि निम्न है -
1. म्यूचुअल फंड
लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देने वाले निवेश विकल्पों में म्यूचुअल फंड को अच्छा माना जाता है।
2. फिक्स डिपॉजिट
कम जोखिम चाहने वाले निवेशकों के लिए बैंक एफडी एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
3. सरकारी योजनाएं
पीपीएफ, एन एस सी और सुकन्या समृद्धि योजना जैसी सरकारी स्कीमे सुरक्षित और स्थिर रिटर्न प्रदान करती है।
4. डिजिटल गोल्ड या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
यदि कोई व्यक्ति सोने में निवेश करना ही चाहता है तो फिजिकल गोल्ड खरीदने कि बजाय सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड बेहतर विकल्प हो सकता है इससे देश पर आयात का दवाब भी कम होगा।
आम जनता की मिली जुली प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री की इस अपील पर लोगों की मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। कुछ लोग इसे देश हित में जरुरी कदम मानते है तो वही कुछ लोग मानते है कि भारतीय समाज में सोने का भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्त्व बहुत अधिक है।
वही विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार लोगों को जागरूक करने के साथ साथ बेहतर निवेश विकल्पों कि जानकारी दे तो लोग धीरे धीरे अपनी निवेश आदतों में बदलाव ला सकते है।
निष्कर्ष
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल संकट के बीच भारत को अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखना एक चुनौती है। प्रधानमंत्री का सोना ना खरीदने की अपील एक आर्थिक सलाह ही नही अपितु देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने का प्रयास है। यदि देशवासी इस अपील कों गंभीरता से लें तो इससे भारत की आर्थिक स्तिथि को मजबूती मिलेगी साथ ही आने वाले समय में महंगाई और आर्थिक दवाब को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।