अमेरिका - ईरान के बीच बहुत पुराना मुद्दा है। दोनों देशो के बीच सम्बन्ध उतार चढ़ाव से भरे हुये रहे है। कई बार तो तनाव इतना बढ़ा कि युद्ध जैसी स्थिति में पहुँच गया। अब गंभीर सवाल यह बनता है कि—दोनों देशों के मध्य बातचीत के बावजूद तनाव कम क्यों नहीं हुआ? आखिर बातचीत से ट्रंप संतुष्ट क्यों नहीं हुए और युद्ध टला क्यों नहीं? इसे आसान भाषा में समझते हैं।  

USIR अमेरिका - ईरान विवाद

1. परमाणु कार्यक्रम विवाद -

अमेरिका और पश्चिमी देशों को आशंका थी कि ईरान परमाणु कार्यक्रम विकसित कर रहा है। सन् 2015 में ईरान और विश्व शक्तियों के बीच एक संयुक्त समझौता हुआ जिसको JOINT Comprehensive Plan of action (JC POA) कहा जाता है

इस समझौते के अन्तर्गत

* ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियों पर सीमाएँ स्वीकार कीं।

* इसके बदले में ईरान से आर्थिक प्रतिबंध हटाए

ट्रप के खुश न होने के कारण

1. परमाणु समझौते से असहमत 

सन् 2018 में राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका को JC POA से बाहर कर दिया।

कारण

* यह समझौता बहुत कमजोर है। 

* इससे ईरान की मिसाइल गतिविधियाँ नहीं रुकती। 

* क्षेत्रीय हस्तक्षेप (सीरिया, ईराक, लेबनान) जारी रहता 

और उन्होंने ईरान पर फिर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए।

2. अधिकतम दबाब नीति

ट्रम्प ने ईरान पर आर्थिक और कुटनीतिक दबाब बढ़ाया

* तेल नियति पर प्रतिबंध

* सैन्य दबाब

* बैंकिंग और व्यापार पर प्रतिबंध नीति का उद्देश्य था कि ईरान नए और सख्त समझौतों के साथ शर्तें माने। 

तनाव बढ़ने का कारण

1. कासिम सुलेमानी की हत्या

अमेरिका ने ईरान के वरिष्ठ सैन्य कमाण्डर कासिम सुलेमानी की वर्ष 2020 में ड्रोन हमले में मार गिराया। 

इसकी वजह से

* ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। 

* मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा बढ़‌ गया।

2. क्षेत्रीय संघर्ष

ईरान और अमेरिका अलग-अलग समूहों का समर्थन करते रहे

* ईराक

* सीरिया

* यमन

* लेबनान

जैसे क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष टकराव जारी रहा।

जंग न टलने का कारण

आपस में अविश्वास

दोनों देशों के बीच आपसी भरोसा न हो सका।

अलग-अलग रणनीतिक लक्ष्य

अमेरिका

ईरान का लक्ष्य परमाणु कार्यक्रम रोकना और क्षेत्रीय प्रभाव सीमीति करना था।

ईरान

ईरान का लक्ष्य क्षेत्रीय शक्ति रूप में अपनी स्थिति मजबूत करना था

घरेलू राजनीति

दोनों देशों की आन्तरिक राजनीति भी सख्त रुख अपनाने को दबाब बनाती रही।

वैश्विक असर

* तेल की कीमतो पर 

* वैश्विक‌ बाजारो पर

* खाडी क्षेत्रों की सुरक्षा पर

यदि मध्य पूर्व अस्थिर होता है तो प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है।

क्या पूरी जंग हो सकी?

कई बार जंग जैसे हालात बने किन्तु पूर्ण रूप से जंग नही हुई दोनों देशों ने सीमित कार्यवाही की और प्रत्यक्ष युद्ध से बचते रहे।

निष्कर्ष

ट्रम्प की ईरान नीति कड़े रुख और दबाब पर आधारित थी। वे पुराने परमाणु समझौते से संतुष्ट नहीं थे और ईरान पर व्यापक प्रतिबंध चाहते थे। बातचीत की कोशिशें अविश्वास, क्षेत्रीय संघर्ष और राजनीतिक दबाव के चलते कारगर न हो सकीं। भले ही पूर्ण युद्ध टल गया हो, परन्तु दोनों देशों के संबंध आज भी अस्थिर और संवेदनशील बने हुए हैं।